30 बोरी सीमा और खरीद केंद्र घटाने की चर्चा से परेशान, 20 जुलाई के मंत्रिमंडल फैसले पर टिकी निगाहें
खरीद केंद्र कम होने और सीमा तय होने से छोटे बागवानों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। हिमाचल प्रदेश में मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (एमआईएस) को सीमित किए जाने की चर्चाओं ने बागवानी क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। प्रस्तावित नई नीति के तहत प्रति बागवान केवल 30 बोरी सेब खरीदने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही एमआईएस खरीद केंद्रों की संख्या भी घटाई जा सकती है। बागवानों ने इस पर कड़ा एतराज जताते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
संयुक्त किसान मंच 20 जुलाई को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक के फैसले का इंतजार कर रहा है। वर्ष 1986 में शुरू की गई एमआईएस पिछले करीब चार दशकों से लाखों बागवानों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच बनी हुई है। इसका मुख्य उद्देश्य बाजार में कीमतें गिरने की स्थिति में सेब सहित अन्य बागवानी उत्पादों को मूल्य समर्थन प्रदान करना है।
बागवानों का कहना है कि 30 बोरी की सीमा तय होने से बड़ी मात्रा में जूस ग्रेड सेब एमआईएस के दायरे से बाहर हो जाएगा। इससे विशेषकर छोटे बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। प्रदेश में करीब 300 खरीद केंद्र हैं। इनकी संख्या में कटौती की चर्चाओं ने भी बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। उनका कहना है कि यदि खरीद केंद्र कम किए गए तो दुर्गम क्षेत्रों के बागवानों को अपना सेब लंबी दूरी तक ले जाना पड़ेगा, जिससे परिवहन लागत में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
बागवानों ने योजना को कमजोर करने वाले किसी भी निर्णय का पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने याद दिलाया कि हिमाचल में एमआईएस को लेकर वर्ष 1990 का बागवान आंदोलन एक महत्वपूर्ण घटना रहा है। उस आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में तीन बागवानों की जान चली गई थी, जिसके बाद सरकार को अपनी नीति पर पुनर्विचार करना पड़ा था।
संयुक्त किसान मंच के प्रदेश संयोजक हरीश चौहान ने मांग की कि एमआईएस में किसी भी बदलाव से पहले किसान-बागवान संगठनों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से व्यापक चर्चा की जाए। उन्होंने पूर्व वर्षों के लंबित भुगतान जल्द जारी करने की भी मांग उठाई। बागवानों का कहना है कि सरकार एमआईएस को सीमित करने के बजाय इसे अधिक प्रभावी, पारदर्शी और बागवान हितैषी बनाए।