संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू।
एक और जहां प्रदेश सरकार पशु पालकों के उत्थान करने का दावा कर रही है। वहीं, उपमंडल राेहड़ू, जुब्बल और चिड़गांव के पशु चिकित्सालय और डिस्पेंसरियों में पशु चिकित्सकों और फार्मासिस्टों की कमी चल रही है। इस कारण क्षेत्र के पशुपालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नए स्टाफ की तैनाती के उल्ट कर्मचारियों की इच्छा पर उन्हें शिमला समेत शहरी हलकों में प्रतिनियुक्ति पर भेजा जा रहा है। क्षेत्र के अंतर्गत 14 पशु चिकित्सालय और 82 औषधालय हैं। इनके पास 25 हजार गायें, 40 हजार भेड़-बकरियां और 10 हजार अन्य पालतु पशु पंजीकृत हैं। उपमंडल में 14 पद चिकित्सक और 96 पद फार्मासिस्टों के पद स्वीकृत हैं। इनमें से आठ पद पशु चिकित्सक, 22 पद फार्मासिस्ट के और 59 पद चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के रिक्त चल रहे हैं। पद रिक्त होने के कारण चिकित्सकों और फार्मासिस्टों पर भी कार्य का अतिरिक्त पड़ गया है। रिक्त पदों के चलते पशुपालकों को दी जाने वाली सुविधाएं भी प्रभावित हो रही हैं। पशुपालन विभाग की ओर से पंजीकृत पशुओं को कृत्रिम गर्भाधान, राष्ट्रीय जन्म नियंत्रण, टीकाकरण, टैगिंग का कार्य किया जाता है। पशु राेगों के उपचार की सुविधा को सुचारु रुप से चलाना होता है। वहीं, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को संचालित करने का दायित्व भी विभाग के कर्मचारियों के कंधों पर ही है। ऐसे में उपमंडल में तैनात चिकित्सकों व फार्मासिस्टों को अतिरिक्त कार्यभार संभालना पड़ रहा है। अब पशुपालन विभाग की ओर से गोवंश और भेड़ों को मुंहखुर रोगों से बचाव के लिए मुफ्त टीकाकरण मुहीम शुरू किए जाने का समय हो गया है। ऐसे में कर्मचारियों की कमी के चलते इसे पूरा किया जाना बड़ी चुनौती है।
चिकित्सकों और फार्मासिस्टों के पद रिक्त चल रहे हैं। जिन केंद्रों में पद खाली हैं। वे पास के केंद्र से चलाए जा रहे हैं। विभागीय तौर पर रिक्त पदों को रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी गई है। डाॅ. मोहिंद्र ठाकुर, उपमंडलीय पशु चिकित्सा अधिकारी