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Rampur Bushahar News: लकड़ी से बनी दुकानों से था सजा ठियोग बाजार, रेडीमेड कपड़ों का बड़ा कारोबार

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श्याम लाल गुप्ता :इलेक्ट्रिक दुकान मालि
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अग्निकांड की कई घटनाओं ने बदला स्वरूप, आज सीमेंट की पक्की दुकानों में सजा है बाजार
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हॉट बाजार ठियोग : ऊपरी शिमला प्रवेश द्वार पर सबसे बड़ा बाजार
भवन सामग्री और रेडीमेड कपड़ों के कारोबार के लिए मशहूर
सुनील ग्रोवर
ठियोग (रामपुर बुशहर)। ऊपरी शिमला का प्रवेशद्वार माने जाना वाला ठियोग आसपास की कई पंचायतों का सबसे बड़ा बाजार है। आजादी के बाद समय के साथ कई अन्य बाजार भी अस्तित्व में आए हैं, लेकिन ठियोग बाजार की आज भी अपनी उपयोगिता है। ठियोग बाजार रहीघाट से जनोगघाट के बीच एनएच-पांच तक और शाली बाजार से लेकर सब्जी मंडी तक फैला हुआ है। पुराने समय से यह बाजार भवन सामग्री और रेडीमेड कपड़ों के कारोबार के लिए मशहूर था। यह बाजार लकड़ी की बनीं दुकानों के लिए भी जाना जाता था, लेकिन आग की कई घटनाओं ने इस बाजार को कई जख्म दिए। पहली बार साल 1970 में ठियोग बाजार में हुए अग्निकांड में लकड़ी की बनीं कई दुकानें जली गईं। उसके बाद भी कई आग की घटनाएं हुईं। साल 1992 में भी पुराने बस स्टैंड के पास कई दुकानें आग की भेंट चढ़ीं। इसके बाद 1999 और 2017 में भी भीषण अग्निकांड हुए। जहां आग की इन घटनाओं से बाजार पर काफी असर पड़ा, वहीं समय के साथ बाजार का स्वरूप भी बदला। आज लकड़ी की दुकानों की जगह सीमेंट की पक्की और ऊंची दुकानों ने ले ली है। बाजार में लोगों के मनोरंजन के लिए कई सिनेमा हॉल थे, जो आज मोबाइल के दौर में बंद हो गए हैं। लकड़ी की मांग काम होने से बाजार में स्थित आरा मशीनें बंद हो गई हैं।
आज महंगी हुई दुकानें
स्थानीय कारोबारी बताते हैं कि साल 2000 के बाद दूसरे प्रदेशों के व्यापारियों के व्यापार में आने के बाद हालत काफी बदल गए हैं। पहले बाजार में किराये की दुकानों में व्यापार करना इतना मुश्किल और महंगा नहीं था। वर्तमान में 30 से 40 हजार रुपये प्रति माह के किराये की दुकान में व्यापार करना मुश्किल हो गया है। समय के साथ मोबाइल और आभूषणों की कई नई दुकानें खुल गई हैं। बाजार में शोरूम बनाने का चलन बढ़ गया है। कोरोना काल के बाद मोबाइल की दुकानों की बढ़ती मांग ने बाजार को बदला है।
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लेडीज कपड़ों का बना बाजार
वर्तमान में ठियोग बाजार में लेडीज कपड़ों का ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार काफी फल-फूल रहा है। रामपुर, किन्नौर, रोहड़ू और तत्तापानी से भी ग्राहक ठियोग के शाली बाजार में खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। बागवानी से जुड़े उपकरणों और दवाइयों की कई बड़ी दुकानें खुल गई हैं। बाजार में अंतरराष्ट्रीय ब्रांड की दुकानों की कमी खलती है। वहीं, बाजार में अब मोची, ड्राई क्लीनर और मेकेनिक की दुकानें लगभग न के बराबर हैं।
कारोबारियों का कहना

पहले बाजार में जरूरत का अधिक सामान बिकता था, लेकिन अब फैशन और स्टाइल का दौर है। मोबाइल के नए नए मॉडल नई पीढ़ी की पहली पसंद है। ठियोग में सुनार और कपड़े की दुकानों से व्यापार को सहारा मिल रहा है अन्यथा सड़क टूटने के कारण कारोबार आधा हो गया है। - श्याम लाल गुप्ता, इलेक्ट्रिक दुकान मालिक

ठियोग बाजार पिछली सदी में पचास किलोमीटर के दायरे का अकेला बाजार था, लेकिन अब जगह-जगह दुकानें खुलने से व्यापार पर असर पड़ा है। शाली बाजार के शोरूम बड़े शहरों के जैसे हैं। ठियोग में बड़े कार्यालय, उद्योग और पर्यटन स्थलों की कमी से व्यापार कम हो गया है। रही सही कसर टूटी सड़क ने पूरी कर दी है। -कुलदीप ग्रोवर बारदाना व्यापारी

आज ग्राहक सामान पसंद आने पर धन खर्च करने में घबराता नहीं है। पहले के समय में आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण फैशन संबंधी सजावट समान की बिक्री कम होती थी।अधिक दुकानें खुलने से प्रतिस्पर्धा बढ़ने से लोगों को काफी फायदा हुआ है, जबकि दुकानदार के लाभ पर असर पड़ा है। सरकार का नजरिया व्यापरियों के प्रति ज्यादा नहीं बदला है, जिसे लेकर दुख होता है। - राघव जोशी, हार्ड वेयर हाउस मालिक

व्यापार में काफी बदलाव आया है। घरों में अधिक उपकरण रखने से बाजार की कई दुकानें बंद हो गई है। इसमें ड्राई क्लीनर, सिनेमा हॉल और दर्जियों की दुकानें बहुत कम हुई हैं। लोगों के खान-पान में काफी बदलाव आने से फॉस्ट फूड की अधिक डिमांड हुई है। पहले के समय में सादगी और पौष्टिक आहार का अधिक प्रचलन था। - रामपाल, बेकरी कारोबारी ठियोग
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संवाद

श्याम लाल गुप्ता :इलेक्ट्रिक दुकान मालि

श्याम लाल गुप्ता :इलेक्ट्रिक दुकान मालि

श्याम लाल गुप्ता :इलेक्ट्रिक दुकान मालि

श्याम लाल गुप्ता :इलेक्ट्रिक दुकान मालि

श्याम लाल गुप्ता :इलेक्ट्रिक दुकान मालि

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