. देव संस्कृति को संजोये रखने के साथ व्यापारिक दृष्टि से भी बढ़ रहा मेला
पहले राज परिवार करता था आयोजन, अब नगर परिषद सजाती है मेला
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर में फाग मेले की शुरुआत बुशहर रियासत की राजधानी शोणितपुर (सराहन) से हुई। उस समय मेला क्षेत्र के आराध्य देवता बसाहरा और देवता गसोह के सानिध्य में सजता था। बदलते दौर के साथ मेले का स्वरूप बदला। राज परिवार ने वर्ष 1925 में रामपुर बुशहर की स्थापना की। इसके बाद यह मेला रामपुर के राज दरबार परिसर में सजने लगा। वर्तमान में मेले में शिमला और कुल्लू जिले के देवी देवता भाग लेते हैं। पहले राज परिवार इस मेले को सजाता था, वहीं अब मेले की सभी व्यवस्थाएं और गतिविधियां नगर परिषद रामपुर की ओर से की जा रही हैं। देव संस्कृति को संजोये यह मेला अब व्यापारिक दृष्टि से भी खास है। बाहरी राज्यों के कारोबारी मेले में अपनी दुकान लगाते हैं। मेले में देव संस्कृति की झलक देखने के आज भी दूरदराज से लोग रामपुर पहुंचते हैं।
होली के अगले दिन से शुरू होता है मेला
यह मेला होली के अगले दिन से शुरू होता है। होली उत्सव के दिन तीन देवता राज दरबार पहुंचते हैं और यहां राज परिवार के साथ होली खेलते हैं। होली के अगले दिन शिमला और कुल्लू जिले के देवी-देवताओं का मेले में आगमन होता है। मेले में आने वाले देवी-देवताओं का प्रशासन और नगर परिषद की ओर से स्वागत किया जाता है। वर्षों से यहां देव संस्कृति के अनूठे नजारे देखने को मिलते हैं।
अनाज बांटने की प्रथा हुई खत्म
कई वर्षों तक मेले में आने वालीं महिलाएं चावल, गेहूं की मोड़ी लेकर पहुंचती थीं, जिसे सभी में बांटा जाता था। अब यह प्रथा समाप्त हो चुकी है। मेले में अब व्यापार गतिविधियां शामिल हो गई हैं। पदम पैलेस में जहां देवी-देवताओं का मेला सजता है, वहीं नेशनल हाईवे-पांच पर व्यापार गतिविधियां आयोजित हो रही हैं। मेले में स्थानीय व्यापारियों के साथ साथ बाहरी राज्यों से भी व्यापारी पहुंच रहे हैं। मेले में करीब एक माह तक व्यापार का सिलसिला चलता है। इस बार 5 से 8 मार्च तक चार दिवसीय फाग मेला आयोजित होगा।