कुंदन कंपनी ग्रुप के अधिकारी चमोली बाढ़ में मरने वाले युवकों के परिवारों के साथ बैठक करते हुए।
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रामपुर बुशहर। उत्तराखंड के चमोली त्रासदी के मृतकों के परिजन मुआवजे के लिए दर-दर भटक रहे हैं। जिस परियोजना के लिए युवकों ने दिन-रात कड़ी मेहनत की वही परियोजना प्रबंधन मजदूरों के परिजनों के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं। परियोजनाप्रबंधन तय राशि देकर अपना पल्ला झाड़ रहा है। इसी समस्या को लेकर रामपुर में शुक्रवार पीड़ित परिजनों की बैठक हुई।
किन्नू पंचायत के भगावट गांव के पीड़ित परिजनों ने बैठक कर परियोजना प्रबंधन के विरुद्ध रोष प्रकट किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के चमोली त्रासदी में किन्नू पंचायत के भगावट गांव के पांच युवा आशीष, दीवान चंद, अमित, देवेंद्र और कैलाश ने जान गंवाई। बैठक में पहुंचे पीड़ित परिवारों को उम्मीद थी कि परियोजना प्रबंधन त्रासदी से मिले जख्मों पर मरहम लगाएगा लेकिन परियोजना प्रबंधन के अधिकारियों ने साफ कहा कि कंपनी सिर्फ तय मुआवजा और 18 वर्ष तक बच्चों की पढ़ाई का खर्चा उठाएगा। पीड़ित परिजन दिनेश, साधराम, संदीप, ममता और भजन दासी ने कहा कि परियोजना प्रबंधन का रवैया नकारात्मक है। उन्होंने चेताया कि यदि एक सप्ताह में नियमानुसार परियोजना प्रबंधन ने उचित मुआवजा नहीं दिया तो रामपुर में रोष प्रदर्शन किया जाएगा।
समाज सेवी कौल नेगी ने कहा कि उत्तराखंड त्रासदी में जान गंवा चुके युवकों के परिजनों को उचित मुआवजा मिलना चाहिए। इस मामले में शीघ्र प्रोजेक्ट प्रबंधन स्थिति स्पष्ट करे। सीटू नेता बिहारी सेवगी ने कहा कि चमोली हादसे में एनटीपीसी प्रोजेक्ट के मजदूरों की भी जान गई थी। प्रोजेक्ट ने भी अपने स्तर पर हर मजूदर के परिजन को 20 लाख की राशि दी है। उसी तर्ज पर रामपुर के पीड़ित परिजनों को भी प्रोजेक्ट मुआवजा राशि और अन्य लाभ दें।
कुंदन ग्रुप के समन्वय अधिकारी सुनील शर्मा ने कहा कि परिजनों को तय राशि और बच्चों को 18 वर्ष तक पढ़ाई करवाने पर प्रोजेक्ट प्रबंधन ने सहमति जताई है। अन्य मुआवजा नहीं दिया जाएगा। इस मौके पर किन्नू पंचायत के पूर्व प्रधान यशपाल चौहान सहित अन्य मौजूद रहे।