साल 1981 में शुरू हुआ था मोचका-दरमोट सिंचाई कूहल का निर्माण कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। चार दशक से सिंचाई सुविधा की आस लगाए दो पंचायतों के ग्रामीणों में सरकार और जल शक्ति विभाग के प्रति रोष है। निरमंड खंड की खरगा और बक्खन पंचायत के सैकड़ों परिवारों को आज दिन तक योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। ग्रामीणों की जन शक्ति संघर्ष समिति ने योजना के निर्माण को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है। समिति ने प्रदेश सरकार और जल शक्ति विभाग से जल्द मोचका-दरमोट सिंचाई कूहल का कार्य पूरा करने की मांग उठाई है।
मंगलवार को ग्रामीणों की जन शक्ति संघर्ष समिति की बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष सुभाष ठाकुर ने की। जन शक्ति संघर्ष समिति ने सिंचाई कूहल निर्माण को लेकर लेटलतीफी पर रोष जताया है। ग्रामीणों ने कहा कि साल 1981 में खरगा पंचायत के सैकड़ों किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए मोचका-दरमोट सिंचाई कूहल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। उस समय कूहल की निर्माण लागत करीब 6.54700 लाख रुपये थी, लेकिन आज 44 वर्ष बाद भी इस सिंचाई कूहल का निर्माण नहीं हो पाया है। चार दशक में कूहल की निर्माण लागत करीब 6.85 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। 13 किलोमीटर लंबी इस सिंचाई कूहल का निर्माण कार्य 2019-20 से ठप पड़ा है, जिससे ग्रामीणों में खासा रोष है। समिति ने कहा कि जल शक्ति विभाग आनी दोनों पंचायतों के ग्रामीणों को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। विभाग करीब साढ़े छह करोड़ की डीपीआर तैयार करने की बात कर रहा है, जबकि निर्माण लागत करीब छह करोड़ 84 लाख 98 हजार रुपये तक है। उन्होंने कहा कि विभाग छह माह पूर्व डीपीआर तैयार करने का हवाला दे रहा है, जबकि छह माह पूर्व सितंबर 2024 में यह डीपीआर वापस आ गई है। इसका मुख्य कारण वित्त वर्ष 2024-25 में डीपीआर का प्राथमिकता में न होना है। उन्होंने प्रदेश सरकार और विभाग से वित्त वर्ष 2025-26 में इस कूहल के निर्माण को प्राथमिकता में रखने की मांग की है। साथ ही सरकार से जल्द बजट का प्रावधान कर निर्माण पूरा करने की मांग उठाई है। समिति ने कहा कि कूहल के निर्माण को लेकर निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी। इस मौके पर समिति के उपाध्यक्ष गोपाल चौहान, सचिव जिया लाल कौशल, देवी चंद, राकेश चंद, मस्त राम ठाकुर, मोहन लाल, किशोरी लाल सहित अन्य मौजूद रहे।