संवाद न्यूज एजेंसी
भावानगर (किन्नौर)। किन्नौर जिले की दुर्गम पंचायत रूपी की सड़क की हालत बेहद खराब है। चौरा-रूपी संपर्क मार्ग पर सफर जानलेवा बना हुआ है। हाल यह है कि सेब से लदे वाहनों को धक्के मार कर निकालना पड़ रहा है। सड़क निर्माण हुए पांच वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन बजट के अभाव में सड़क पक्की नहीं हो पा रही है। इस कारण सफर जानलेवा बना हुआ है, वहीं बागवानों को भी सेब की फसल को मंडियों तक पहुंचाना चुनौती बना हुआ है। वर्षों से हजारों ग्रामीण खस्ताहाल सड़क पर खतरे के साये में सफर करने को मजबूर हैं। खासकर, मरीजों को हिचकोले खाते हुए अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है। सरकार और विभाग की अनदेखी हजारों ग्रामीणों पर भारी पड़ रही है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनी इस सड़क को पक्का करने के लिए अब तक बजट का प्रावधान नहीं हो पाया है। वर्तमान समय में यह सड़क जगह-जगह गड्ढों में तबदील हो गई है और कई स्थानों पर हादसे होने की आशंका बनी हुई है। वहीं, हाल ही में शिगारचा नाला में जलस्तर बढ़ने से चार कलवर्ट बह गए हैं और पानी सड़क पर बह रहा है। इससे सड़क की हालत बेहद खराब हो गई है। सबसे ज्यादा दिक्कत शिगारचा नाला, रावे नाला, तिबला नाला और पोश्पा की कैंचियों में आ रही है। पूर्व प्रधान रूपी रघुदास नेगी, उपप्रधान मुकेश नेगी, बीरबल नेगी, अर्जुन सिंह नेगी, धर्मपाल नेगी, मनमोहन सिंह नेगी, पुरषोतम नेगी, संजीव नेगी और राजकुमार सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि सेब सीजन शुरू हो गया है। सड़क की दयनीय दशा के कारण सेब की गाड़ियों को धक्का मार कर निकालने को मजबूर होना पड़ रहा है। इस मार्ग से रूपी पंचायत के मझगांव, शिगारचा, हुरवा, बूरंग, गुरगुरी, पोश्पा, डबलिंग, नालिंग-1, नालिंग-2 और बटकाव गांव लाभान्वित होता है। उन्होंने सरकार और विभाग से सड़क की दशा सुधारने की मांग उठाई है, ताकि हजारों लोगों सहित बागवानों को राहत मिल सके।
जलस्तर बढ़ने से बह गए चार कलवर्ट
हाल ही में शिगारचा नाले में जलस्तर बढ़ने से चार कलवर्ट बह गए हैं। इस कारण सड़क खराब हो गई है। सड़क को दुरुस्त करने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।
- हितेश ठाकुर, कार्यवाहक एसडीओ, लोक निर्माण विभाग भावानगर