रिकांगपिओ में वन निगम उपाध्यक्ष के माध्यम से मुख्यमंत्री एंव शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजते हुए ?
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रिकांगपिओ (किन्नौर)। प्रदेश सरकार द्वारा शास्त्री एवं भाषा अध्यापकों को टीजीटी का पदनाम तो दिया गया है, लेकिन अभी भी वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त अध्यापकों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। इसको लेकर हिमाचल प्रदेश राजकीय संस्कृत शिक्षक परिषद का प्रतिनिधिमंडल राज्य उपाध्यक्ष डॉ जंगछुब नेगी की अध्यक्षता में वन निगम उपाध्यक्ष सूरत नेगी से मिला।
संघ ने उनके माध्यम से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और शिक्षामंत्री को परिषद की मांगों को लेकर ज्ञापन भेजा। परिषद ने ज्ञापन में कहा कि प्रदेश सरकार ने शास्त्री एवं भाषा अध्यापकों को टीजीटी पदनाम दिया है, लेकिन अभी भी वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त भाषा एवं शास्त्री अध्यापकों सहित 2011 के बाद एनआईओएस और डीएलएड पास अध्यापकों को टीजीटी पदनाम नहीं दिया गया है। इससे अध्यापकों को टीजीटी पदनाम का कोई लाभ नहीं हुआ है।
परिषद में प्रदेश मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री से मांग करते हुए कहा कि आज तक नियुक्त सभी शास्त्री और हिंदी अध्यापकों को टीजीटी संस्कृत और हिंदी पद्नाम देने के साथ-साथ आने वाली भर्तियां पर आरएंडपी रूल लगाया जाए, ताकि अध्यापकों में एकरूपता बनी रहे। इस मौके पर किन्नौर वित्त सचिव रतन छोष्टुप, जितेंद्र कालिया, भोला दत्त और अश्वनी सहित कई अन्य शिक्षक मौजूद रहे।