भावानगर(किन्नौर)। किन्नौर जिले में प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग की नाकामी विद्यार्थियों के भविष्य पर भारी पड़ रही है। जिले की दुर्गम पंचायत रूपी में बीते लंबे समय से शिक्षकों के पद रिक्त हैं। ऐसे में स्कूल में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं बेहतर शिक्षा से वंचित हैं और उनका भविष्य अंधकारमय बना हुआ है। आलम यह है कि स्कूल में प्रधानाचार्य सहित शिक्षकों के आधा दर्जन से अधिक पद रिक्त हैं, ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित रही है।
वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रूपी में शिक्षकों के रिक्त पदों के कारण अभिभावक अपने बच्चों को दूसरे स्कूलों में भेजने को मजबूर हैं। बीते लंबे समय से शिक्षक न होने के कारण स्कूल के कई दर्जन विद्यार्थी दूसरे स्कूलों में पलायन कर चुके हैं। स्कूल में प्रधानाचार्य का पद 2016, पीटीआई 2016, इतिहास प्रवक्ता का पद जून 2023, संस्कृत का 2007, टीजीटी आर्ट्स के दो शिक्षकों के पद 2022, मार्च 2023, शास्त्री का पद जून 2023 से रिक्त पड़े हैं। स्कूल में छठीं से लेकर बारहवीं कक्षा तक करीब 50 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। जबकि शिक्षकों के रिक्त पदों के कारण अभिभावकों ने अपने बच्चों को रामपुर, शिमला और चंडीगढ़ के स्कूलों में भेज दिया है। पूर्व प्रधान रूपी रघुदास नेगी, बीरबल नेगी, सतीश कुमार नेगी, रोशन लाल नेगी, विरेंद्र नेगी, शिव कुमार नेगी, मुकेश कुमार नेगी ने कहा कि स्कूल में शिक्षक न होने से विद्यार्थियों पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बेहतर शिक्षा न मिलने से उन्हें अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है। उन्होंने प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग से शिक्षकों की तैनाती करने की मांग उठाई है।
भाजपा जिला प्रवक्ता प्रवीन मोयान ने कहा कि कांग्रेस सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। जिले के दुर्गम स्कूलों में शिक्षकों के कई पद रिक्त पड़े हैं। ऐसे में बच्चे दूसरे स्कूलों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
उधर, उच्च शिक्षा उपनिदेशक किन्नौर सुरेंद्र नेगी ने बताया कि रूपी स्कूल में रिक्त पड़े शिक्षकों के पदों को लेकर विभाग के अधिकारियों और सरकार से पत्राचार किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही शिक्षकों की तैनाती होगी।