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बोर्ड और शिक्षकों के दो कैडर बनाने से गिरेगा मनोबल, पढ़ाई होगी प्रभावित : देवेंद्र लक्टू

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शिमला में हिमाचल प्रदेश संयुक्त अध्यापक फेडरेशन की बैठक में मौजूद शिक्षक। स्रोत : संघ
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. सरकार की सीबीएसई स्कूलों के लिए जारी की गई अधिसूचना और राजपत्र पर शिक्षकों ने किया मंथन
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. हिमाचल प्रदेश संयुक्त अध्यापक फेडरेशन जिला शिमला की बैठक में अलग कैडर बनाने पर जताई चिंता
. चेताया, शिक्षकों के हित दरकिनार किए तो आंदोलन करने को होंगे मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। प्रदेश सरकार की ओर से सीबीएसई स्कूलों के लिए दो बोर्ड और शिक्षकों के दो कैडर बनाने से उनका मनोबल गिरेगा। इसका प्रभाव छात्रों की पढ़ाई पर भी पड़ेगा। यह बात हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ जिला शिमला के अध्यक्ष एवं रामपुर के दत्तनगर स्कूल के शिक्षक देवेंद्र लक्टू ने बैठक में कही। हिमाचल प्रदेश संयुक्त अध्यापक फेडरेशन जिला शिमला की विशेष बैठक राजकीय उत्कृष्ट माध्यमिक विद्यालय छोटा शिमला में हुई। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ जिला शिमला के अध्यक्ष देवेंद्र लक्टू की अध्यक्षता में बैठक संपन्न हुई। बैठक में हिमाचल प्रदेश संयुक्त अध्यापक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष अजय नेगी, प्रदेश संरक्षक तरुण नेष्टा और राज्य महिला प्रकोष्ठ अध्यक्षा दया दत्ता विशेष रूप से उपस्थित रहे। मंच सहित अन्य गतिविधियों का संचालन जिला महासचिव आकाशदीप ने किया। बैठक में प्रदेश में सीबीएसई स्कूलों के बारे में प्रदेश सरकार की ओर से जारी की गई अधिसूचना और राजपत्र पर गहन विचार-विमर्श किया गया। सभी उपस्थित शिक्षकों ने सीबीएसई स्कूलों में सरकार की ओर से शिक्षकों का अलग कैडर बनाए जाने पर चिंता और असुरक्षा की भावना जताई। इसके अलावा बैठक में यह मुद्दा भी गरमाया कि अब प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में 30-35 वर्षों से छात्रों को पढ़ा रहे शिक्षकों की सीबीएसई स्कूलों में परीक्षा के माध्यम से नियुक्ति की जाएगी, जोकि उनके लंबे अनुभव एवं नियुक्ति पर प्रश्न चिह्न लगाता है। उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों ने प्रदेश के हजारों छात्रों को उच्च पदों पर पहुंचाया है, उन्हें अपनी योग्यता साबित करने के लिए बाध्य करना सरासर अन्याय है। इससे शिक्षकों ने अपनी वरिष्ठता समाप्त होने और अन्य लाभों के न मिलने पर भी चिंता जताई। कहा कि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद भी राजपत्र में शिक्षकों की वरिष्ठता संरक्षण से संबंधित बिंदुओं को न हटाए जाने पर असंतोष व्यक्त किया गया। शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष को जारी रखने का संकल्प लिया। बैठक में सुरेंद्र कंवर, सुनील रणाइक, मनोज चंदेल, अजीत सिंह, डॉ. सत्य प्रकाश, संजीव शर्मा, विनोद नेगी, अमर देष्टा, सुदर्शन शर्मा सहित जिले भर के कई अन्य शिक्षक मौजूद रहे।
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परीक्षा तिथि पर जताई चिंता
बैठक में सीबीएसई स्कूलों में 22 मार्च, 2026 को शिक्षकों के लिए आयोजित परीक्षा तिथि पर भी चिंता जताई गई। देवेंद्र लक्टू ने कहा कि प्रदेश के स्कूलों में 5 से 29 मार्च तक बोर्ड परीक्षाएं होनी सुनिश्चित हैं। प्रदेश में हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग और हिमाचल प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन जैसी बड़ी परीक्षा एजेंसियां मौजूद हैं। इनके माध्यम से शिक्षकों की नियुक्तियां की गई हैं, लेकिन आज हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से शिक्षकों की परीक्षा लेने पर प्रदेश की परीक्षा एजेंसियों की ओर से ली गई परीक्षा की विश्वसनीयता और उपयुक्तता पर प्रश्न चिह्न लग रहा है। शिक्षकों की चयन प्रक्रिया में विद्यालय विकल्प, पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की भी मांग रखी गई।
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