बजट के अभाव में अधर लटका खिउंचा संपर्क मार्ग
सड़क सुविधा न होने से 7 किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर खिउंचा गांव के ग्रामीण
कंधों पर उठाकर अस्पताल पहुंचाने पड़ते हैं मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। देश को आजाद हुए 76 साल हो चुके हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश के कई दुर्गम क्षेत्र आज भी मूूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। कई गांव अभी भी सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाए हैं। हालात ऐसे हैं कि सड़क की सुविधा न होने के कारण मरीजों को पैदल कंधों पर उठाकर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। ऐसा ही हाल रामपुर उपमंडल की दुर्गम पंचायत कूट खिउंचा क्षेत्र का है। आजादी के सात दशक बाद भी इस क्षेत्र की 40 प्रतिशत आबादी सड़क सुविधा से वंचित है। पंचायत के खिउंचा गांव के ग्रामीण पैदल यात्रा करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों को राशन, एलपीजी गैस सहित अन्य चीजों के लिए सात किलोमीटर दूर पैदल मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है। चुनाव के दौरान में नेता ग्रामीणों से वोट बटोरने के लिए सड़क निर्माण के आश्वासन तो देते आए हैं, लेकिन अब तक चुनावी वादे धरातल पर नहीं उतरे हैं। कोई ग्रामीण बीमार पड़ जाए, तो उसे अस्पताल पहुंचाना लोगों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता। मजबूरी में ग्रामीण समय पर एकत्रित न हों तो बीमारी से पीड़ित व्यक्ति की जान बचाना मुश्किल हो जाता है। क्षेत्र के अनिल कुमार सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि कई बार मरीजों को कंधो पर उठाकर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। उन्होंने सड़क का कार्य जल्द ही शुरू करने की मांग की है।
सड़क निर्माण के लिए 40 लाख रुपये की राशि आई। इससे डेढ़ किलोमीटर सड़क का कार्य किया। यह सड़क प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत स्वीकृत हो गई है। आगे का कार्य बजट आने के बाद शुरू किया जाएगा।
- निशांत, उप प्रधान
7 किलोमीटर सड़क खोलने के लिए 20 लाख का बजट आया था। 20 लाख के बजट से सात किलोमीटर में से आधा काम कर दिया है, लेकिन अब आगे के लिए बजट का अभाव होने से सड़क का निर्माण कार्य लटका है।
- गोवर्धन शर्मा, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग