संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर/सांगला। किन्नौर जिले की ऊंची चोटियों पर हिमपात जारी है, वहीं निचले क्षेत्रों में बारिश से ठंड बढ़ती जा रही है। बर्फबारी और बारिश के कारण अक्तूबर में ही दिसंबर की सर्दी महसूस हो रही है। वहीं, जिले में सेब तुड़ान और घास कटाई का काम भी रुक गया है। बागवानों को सेब मंडी पहुंचाने की चिंता सता रही है। रविवार से शुरू हुआ बर्फबारी और बारिश का सिलसिला मंगलवार को भी जारी रहा। किन्नौर, कुल्लू और शिमला जिले की ऊंची चोटियों में बर्फबारी होती रही, जबकि निचले क्षेत्रों में बारिश का दौर जारी रहा। रामपुर, निरमंड और आनी उपमंडल में दिनभर रुक-रुक कर बारिश होती रही। सीजन के पहले हिमपात ने ही लोगों को ठंड की चपेट में ले लिया है। किन्नौर की ऊंची चोटियों पर मंगलवार को 8 से 10 सेंटीमीटर तक ताजा हिमपात दर्ज किया गया। किन्नौर जिले के मुख्यालय रिकांगपिओ के सामने किन्नौर कैलाश, जौर खंड, छितकुल, सांगला कंडा, देवर कंडा, पानपो कंडे, नाको के रियो पुरगिल, हांगो जोत और पूह की ऊंची चोटियों में बर्फबारी हुई है। पर्यटन स्थल कल्पा का अधिकतम तापमान 11 डिग्री और न्यूनतम तापमान दो डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सांगला का अधिकतम 10 और न्यूनतम 2.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। मौसम बदलने के कारण तापमान काफी गिर गया है, जिस कारण ठंड काफी बढ़ गई है। किन्नौर जिले में अक्तूबर में ही लोग आग सेंकने को मजबूर हो गए हैं। लगातार बढ़ रही ठंड से लोग ठिठुर रहे हैं।
बागवानों को सता रही सेब मंडी तक पहुंचाने की चिंता
मौसम बिगड़ने से किन्नौर जिले के बागवानों की परेशानी बढ़ गई हैं। यदि यूं ही बारिश और बर्फबारी होती रही तो जिले के बागवानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। जिले के पूह और कल्पा ब्लॉक में इन दिनों सेब सीजन चल रहा है। बर्फबारी के कारण बागवानों ने सेब तुड़ान का कार्य रोक दिया है। ऐसे में यदि मौसम ज्यादा दिन तक खराब रहा तो बागवानों की फसल बगीचे में ही खराब हो सकती है। दोनों ब्लॉक से सेब की करीब साढ़े 13 लाख पेटियां अभी भी देश और प्रदेश की मंडियों में भेजी जानी है। बागवानों को अब मौसम खुलने का बेसब्री से इंतजार है। परिवहन निगम रिकांगपिओ के क्षेत्रीय प्रबंधक अतुल गुप्ता ने बताया कि जिले में बर्फबारी से कोई रूट बाधित नहीं हुआ है। जिले के सभी रूटों पर बसों की बराबर आवाजाही हो रही है।
रिकांगपिओ के सामने किन्नौर कैलाश की पहाड़ियों में हुआ ताजा हिमपात। संवाद