संवाद न्यूज एजेंसी
भावानगर (किन्नौर)। किन्नौर जिले के चौरा और तरांडा पंचायत के कंडों-जंगलों में भेड़ बकरियों में फैली बीमारी से पशुपालक चिंतित हैं। पशुपालकों का कहना है कि बीमारी से सैकड़ों भेड़ बकरियां बीमार हो गई हैं, वहीं पशुपालन विभाग के पशु औषधालयों में बकरियों की फेफड़ों से जुड़ी बीमारी की दवा उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में पशुपालकों को अपनी भेड़- बकरियों को जंगलों में छोड़कर दवाइयों की खोज में दर-दर भटकना पड़ रहा है। चौरा और तरांडा पंचायत के कंडे में काफी समय से भेड़ और बकरियों में बीमारियां फैली हैं। पशुपालकों ने अपने स्तर पर दवाइयां लेकर ठीक करने का प्रयास किया, लेकिन कामयाब नहीं हुए। हालांकि, पशुपालन विभाग के चिकित्सकों के दल ने कुछ भेड़ पालकों तक पहुंचकर भेड़-बकरियों का इलाज भी किया है। पशुपालकों का कहना है कि विभाग जल्द दवाइयां उपलब्ध कराए, क्योंकि जो दवाइयां भावानगर में निजी दवाइयों की दुकानों से उपलब्ध हो रही हैं, वो काफी महंगी है। चौरा गांव के भेड़ पालक मेहर चंद, अशोक कुमार, गोपीचंद, जय सिंह, कैलाश और ज्ञान सिंह ने बताया कि पिछले पांच दिन से भेड़-बकरियों में तेजी से बीमारी फैली है। करीब सौ भेड़-बकरियां बीमार हो गई है। खासकर, बकरियों के फेफड़ों से जुड़ी बीमारी की दवा कहीं उपलब्ध नहीं है। विभाग के औषधालयों में संबंधित दवा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने विभाग से तुरंत दवाइयां उपलब्ध कराने की मांग की है। इनका कहना है कि गर्मियों में बाहर से आने वाले गुज्जरों की भेड़-बकरियां को संबंधित क्षेत्र में लाने पर पाबंदी लगाई जानी चाहिए, क्योंकि गुज्जर हर वर्ष प्रदेश और प्रदेश के बाहर से भेड़-बकरियां लेकर आते हैं। इनमें कई तरह की बीमारियां होती है। इस बार भी गुज्जरों की भेड़-बकरियों में पहले बीमारियां थीं और चुगान साथ होने से अब धीरे-धीरे उनकी भेड़-बकरियों में भी बीमारी लग गई है। चौरा गांव के फकीर चंद ने बताया कि उनका एक बकरा पिछले कल बीमारी से मर गया, क्योंकि उसे फेफड़ों से जुड़ी बीमारी की दवा उपलब्ध नहीं हुई।
बकरियों में सीसीपी बीमारी फैली
तरांडा कंडे जाकर काफी पशुओं का इलाज किया। बकरियों में सीसीपी बीमारी फैली है। इससे फेफड़ों में पानी की बूंदे जैसी बनती हैं। इसके लिए कारगर और तुरंत प्रभावी दवा पशुपालकों को बताई गई है। फिलहाल, विभागीय सप्लाई में यह दवा नहीं है। पशुपालकों को किसी भी तरह की समस्या हो तो संपर्क कर सकते हैं।
- रजत दत्ता, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी भावानगर