लाइफलाइन माने जाने वाली मीनस-कोटी सड़क अब बन चुकी है काल का मार्ग
पिछले एक दशक में हादसों में सैकड़ों घरों के चिराग बुझे
पूरी सड़क पर पैरापिट और क्रैश बैरियर का नामोनिशान नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल(रोहड़ू)। हिमाचल प्रदेश के ऊपरी क्षेत्र नेरवा, चौपाल, रोहड़ू, हरिपुरधार और शिलाई के हजारों लोगों के लिए देहरादून और सहारनपुर तक पहुंचने का सबसे छोटा मार्ग मीनस से कोटी है, लेकिन अब इस मार्ग पर सफर जोखिमभरा हो गया है। करीब 50 किलोमीटर सड़क अब यात्रियों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि दिक्कतें खड़ी कर रही है। मंगलवार को एक बार फिर इस मार्ग ने अपना खूनी खेल खेला। चौपाल से विकासनगर जा रही एक बस सड़क का डंगा धंसने के कारण गहरी खाई में समा गई। इस चीख-पुकार के बीच तीन लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि 33 अन्य यात्री अस्पताल में भर्ती हैं। इस मार्ग पर घटने वाली यह कोई इकलौती घटना नहीं है। पिछले एक दशक में इस 50 किमी की सड़क ने सैकड़ों घरों के चिराग बुझा दिए हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह सड़क अब हादसों का पर्याय बन चुकी है, लेकिन शासन-प्रशासन की नींद नहीं टूट रही। स्थानीय लोगों और यात्रियों के अनुसार ये मौतें हादसा नहीं, बल्कि विभाग की अनदेखी का नतीजा है। पूरी सड़क पर पैरापिट और क्रैश बैरियर का नामोनिशान तक नहीं है। जरा सी चूक हुई नहीं कि वाहन सीधे खाई में गिरता है। सड़क के किनारे लगे डंगे इतने कच्चे और जर्जर हैं कि वाहनों को पास देते समय ताश के पत्तों की तरह ढह जाते हैं। मंगलवार की त्रासदी भी इसी का परिणाम थी। लोगों का आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बाद भी विभाग ने सुधारीकरण के नाम पर केवल कागजी घोड़े दौड़ाए हैं। देहरादून और हरिद्वार जाने के लिए यह मार्ग हिमाचल के लोगों की जीवनरेखा है, लेकिन बदहाली के इस दौर में अब यात्री घर से निकलते समय अपनी सलामती की दुआ मांगते हैं। सवाल यह है कि आखिरकार लोक निर्माण विभाग इस मार्ग को कब सुरक्षित बनाएगा।