मंदिरों के खुलेंगे कपाट, धार्मिक कार्य होंगे शुरू
अपने आराध्य देवताओं के आगमन की तैयारियों में जुटे ग्रामीण
संवाद न्यूज एजेंसी
डंसा/रामपुर बुशहर। फाल्गुन संक्रांति यानी बुधवार को एक माह के स्वर्ग प्रवास से सभी देवी-देवता लौट आएंगे और अपने-अपने देवालयों में प्रवेश करेंगे। देवी-देवता अपने गूर के माध्यम से वर्षभर का अच्छा-बुरा फलादेश सुनाएंगे। ग्रामीण अपने आराध्य देवताओं के आगमन की तैयारियों में जुट गए हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुरूप हर साल देवी-देवता इंद्र देव की सभा में भाग लेने के लिए मकर संक्रांति के दिन अपने मंदिरों से प्रस्थान करते हैं। कुल्लू और बुशहर रियासत के कुछ देवी-देवता एक सप्ताह और 15 दिन के भीतर ही देवालयों में प्रवेश करते हैं, लेकिन अधिकांश देवी-देवता फाल्गुन संक्रांति को ही मंदिरों में प्रवेश करते हैं। दशकों से देवताओं के देवालय में प्रवेश करते ही धार्मिक परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। देवताओं के गूर सालभर के लिए अच्छी-बुरी भविष्यवाणी करते हैं और ग्रामीण फलादेश सुनने के लिए उत्सुक रहते हैं। आज से मंदिरों के बंद कपाट खुलते ही धार्मिक कार्यों पर लगी अघोषित रोक स्वत: हट जाएगी। मंदिरों में श्रद्धालुओं की चहल-पहल शुरू हो जाएगी। परशुराम मंदिर समिति प्रधान खेल चंद नेगी, महासचिव जीएल डमालू, उप प्रधान गौरी दत्त नेगी, कोषाध्यक्ष दुर्गा दत्त शर्मा, जानकी दास, सुरंजन ठाकुर, रूप दास, केदार ठाकुर और आरएन भारद्वाज ने कहा कि देवता साहिब के स्वर्ग प्रवास से लौटने का दशोटी के लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है। हर साल मनगांवण को हजारों की संख्या में लोग देवता साहिब से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद पाने के लिए पहुंचेगे। मंदिर समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए भोग और भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
डंसा मंदिर में ईष्ट के आगमन की खुशी में चलाया सफाई अभियान
परशुराम मंदिर डंसा में देवता साहिब दमुख के स्वर्ग प्रवास से पूर्व महिला मंडल डंसा, पनोली और जगुणी की महिलाओं ने मंगलवार को मंदिर परिसर और आसपास अभियान चलाया। जगुणी महिला मंडल जगुणी से मंदिर की तरफ गुजरने वाले रास्ते को संवारा।