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सलाह: सूखे मौसम बगीचों में स्प्रे करना पड़ सकता है भारी

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रोहड़ू। सूखे मौसम में भी बागवान धड़ल्ले से स्प्रे कर रहे हैं जबकि बगावानी विभाग ने ऐसे मौसम में बागवानों को किसी भी तरह की स्प्रे न करने की सलाह दी है। उच्च तापमान में स्प्रे करने से सेब की पत्तियाें पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। स्प्रेसारिणी के अनुसार बागवान पंद्रह दिनों के अंतराल में स्प्रे करते हैं। ऐसे में बागवान सूखे के मौसम में भी धड़ल्ले से बगीचों में स्प्रे कर रहे हैं। फफूंदनाशकों के साथ-साथ माइट की स्प्रे भी तेजी से की जा रही है। जबकि मौसम स्प्रे करने के लिए अनुकूल नहीं है। उच्च तापमान में दवाइयों के छिड़काव से पौधों की पत्तियां पिल्ली पड़कर झड़ सकती हैं।
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स्प्रे के लिए अधिकतम तापमान 28 डिग्री से अधिक नहीं होना चाहिए। जबकि आजकल दिन का तापमान 30 डिग्री से भी अधिक है। भूमि में नमी भी कम है। ऐसे में प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की अधिक आशंका है। सूखे मौसम के कारण फफूंदजनक रोग नहीं पनप रहे हैं। साथ ही सूखे मौसम में माइट की शिकायत भी काफी कम है। उद्यान विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ डाॅ. संजय कुमार ने बताया कि सूखे के मौसम में बागवान किसी भी तरह की स्प्रे करने से बचें। इससे पौधों की पत्तियाें पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सूखे मौसम में फफूंदजनक रोग नहीं फैलते है न ही माइट की शिकायत बगीचों में देखी जा रही है। ऐसे में जब तक वर्षा नहीं होती और तापमान में गिरावट नहीं आती है, दवाइयों की स्प्रे बगीचों में न करें।
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