ठियोग में नशे के खिलाफ निकाली रैली, कस्बे के व्यापारियों ने दो घंटे बाजार रखा बंद
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चिट्टा मुक्ति को लेकर तहसीलदार को सौंपा 15 सूत्रीय मांगपत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग (रामपुर बुशहर)। ठियोग में बुधवार को चिट्टे के खिलाफ युवाओं ने हुंकार भरी और नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई। जागरूक युवा मंच ठियोग ने चिट्टे और नशा तस्करों के खिलाफ विशाल रैली निकाली। इस रैली में जनसैलाब सड़क पर उमड़ा। युवा, महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय संस्थाओं ने एक सुर में नशा मुक्त समाज निर्माण के लिए आवाज बुलंद की। इस दौरान कस्बे के कारोबारियों ने दो घंटे बाजार बंद रखा और रैली में भाग लिया। ऐतिहासिक आलू मैदान से अस्पताल परिसर से होते हुए पुराने बस अड्डा तक विशाल रैली निकाली गई। मंच के अध्यक्ष अरुण चंदेल ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि अब नोटिस नहीं, नशा तस्कारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहिए। प्रशासन की ओर से मौके पर पहुंचे तहसीलदार वरुण गुलाटी को 15 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन देकर नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई गई। रैली के दौरान पूरा क्षेत्र नारों से गूंज उठा। लोगों के चेहरों पर आक्रोश भी था और बदलाव का संकल्प भी। यह केवल एक रैली नहीं, बल्कि प्रशासन और सरकार के लिए एक सामाजिक चेतावनी थी। सड़कों से उठी यह आवाज अब एक व्यापक जनआंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है। लोगों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि ड्रग माफिया पर निर्णायक प्रहार नहीं हुआ, तो यह संघर्ष और तेज होगा। मंच ने साफ शब्दों में चेताया है कि यदि सरकार अगले विधानसभा सत्र में नशे के खिलाफ उचित और सख्त कानून नहीं बनाती है, तो यह आंदोलन और उग्र किया जाएगा। नशे के विरोध में आम आदमी ही नहीं बल्कि ठियोग व्यापार मंडल के व्यापारियों ने भी दो घंटे अपनी दुकानें बंद रख कर इस अभियान को अपना समर्थन दिया। वरिष्ठ और युवा दुकानदारों ने नशे के खिलाफ मुहिम में भविष्य में भी अपना सहयोग देने की घोषणा की। इस दौरान जनोग घाट, प्रेम घाट, शाली बाजार, नया बाजार, रही घाट और बस अड्डे की सभी दुकानें बंद रही। बसों से यात्रा करने वाले यात्रियों को खाने पीने के सामान की कमी का सामना करना पड़ा।
सरकार के सामने रखी ठोस मांगें
रैली में मौजूद लोगों ने पांच ग्राम से कम चिट्टे के साथ पकड़े गए आरोपी को नोटिस पर रिहा न करने, आदतन आरोपियों को कम से कम एक वर्ष तक एनडीपीएस एक्ट के तहत पाबंद करने की मांग उठाई। इसके अलावा प्रत्येक जिले में एनडीपीएस मामलों के लिए अलग थाना स्थापित करने, सरकारी नशा निवारण केंद्र खोलने की मांग भी की। नशा निवारण केंद्रों में डॉक्टरों व मनोवैज्ञानिकों की स्थायी तैनाती करने, सभी स्कूलों और सरकारी कर्मचारियों का वर्ष में दो बार अनिवार्य डोप टेस्ट करवाने, नागरिक अस्पतालों में अलग से मनोवैज्ञानिक चिकित्सक नियुक्त करने की मांग उठाई। इसके अलावा ड्रग्स में संलिप्त सरकारी कर्मचारियों को तत्काल बर्खास्त करने और ड्रग माफिया पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस को विशेष बजट उपलब्ध करवाने जैसी मांगें रखीं। जनसमूह की एक ही मांग थी छोटे उपभोक्ताओं पर नहीं, बड़े माफिया पर वार किया जाए, ताकि नशे के कारोबार की असल जड़ पर चोट की जा सके। जनसभा में पुलिस की ओर से की जा रही कार्रवाई को आदर्श कार्रवाई बताया, लेकिन पुलिस बल की कम संख्या की वजह से पुलिस प्रशासन के हाथ बंधे होने पर सरकार को नई भर्तियां करने की भी मांग की गई।
प्रदर्शन में आए मनोवैज्ञानिक सोहन चंदेल ने कहा कि नशा केवल एक कानूनी समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य का संकट है। जब तक समाज का हर व्यक्ति नशे की आपूर्ति रोकने के लिए आगे नहीं आएगा, तब तक यह जहर खत्म नहीं होगा। नेहा हेटा ने कहा कि नशे को न कहना ही सबसे बड़ा साहस है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे स्वयं जागरूक बनें और अपने साथियों को भी इस दलदल से बाहर निकालें। स्वयं सहायता समूह की रीना शर्मा ने कहा कि मातृशक्ति इस लड़ाई की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है। घर से जागरूकता शुरू होगी, तभी समाज बदलेगा।
नशामुक्ति को लेकर आयोजित रोष रैली के समर्थन में उतरे ठियोग के व्यापारी, दो घंटे बाजार रखा बंद।