दोपहर बाद मौसम ने अचानक बदली करवट, छाया अंधेरा
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर और आसपास के क्षेत्रों में सहित किन्नौर के कई क्षेत्रों में शुक्रवार दोपहर को मौसम ने अचानक करवट बदली। मौसम में बदलाव के बाद झमाझम बारिश का दौर शुरू हुआ। रामपुर की नोगवैली में कड़कड़ाती बिजली के साथ भारी ओलावृष्टि भी हुई। बारिश से रामपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में गर्मी से राहत मिली है। साथ ही फलों और सब्जियों को भी लाभ होगा, लेकिन ओलावृष्टि से सेब और गुठलीदार फसलों को नुकसान की आशंका हैं।
रामपुर शहर, डंसा, तकलेज, ज्यूरी, सराहन, रिकांगपिओ, कल्पा, आदि क्षेत्रों में दोपहर को अचानक बादल छा गए। पहले तो हल्की बारिश हुई। दोपहर बाद तेज बारिश का सिलसिला शुरू हुआ। इस दौरान बिजली भी कड़कती रही। नोगवैली के डंसा और जगूणी में भारी ओलावृष्टि भी हुई। तेज बारिश के कारण कई सड़कों और एनएच-पांच पर जलभराव हो गया। राहगीरों को आवाजाही करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दिन को ही इलाके में अंधेरा छा गया। देर शाम तक बारिश का सिलसिला जारी रहा। अचानक हुई बारिश से बाजार पहुंचे कुछ लोग छतरी के सहारे अपने गंतव्य को निकले, तो कई बारिश रुकने का इंतजार करते रहे। वहीं, कई लोग बारिश में भीगते हुए ही अपने-अपने गंतव्य को रवाना हुए। बारिश होने से सेब, नाशपाती और गुठलीदार फलों को लाभ मिलेगा। फलों का आकार बढ़ने में मदद मिलेगी और ड्रॉपिंग की समस्या से भी निजात मिलेगी। वहीं, सब्जियों को भी संजीवनी मिली है। किसानों ने टमाटर, भिंडी, मटर, फ्रांसबीन, बैंगन, शिमला मिर्च और मिर्च सहित अन्य सब्जियां उगाई हुई हैं। बारिश होने से किसानों को राहत मिली है। दूसरी ओर सेब की बढ़ोतरी के लिए ताजा बारिश भले ही संजीवनी का काम करे, लेकिन ओलावृष्टि ने फिर से नुकसान होने की आशंका है। इन दिनों मध्यम ऊंचाई वाले सेब बहुल क्षेत्रों नोगवैली, बारहबीस, नरेन, बाहली और गौरा मशनू में सेब अखरोट के आकार में बनने के कगार पर हैं। ऐसे में ताजा ओलावृष्टि होने से सेब पर दाग लगने से खराबी के आसार बन जाते हैं। सेब के दाने पर घाव पड़ने से आकार में बढ़ोतरी भी संभव नहीं हो पाती।
हर साल प्रकृति की मार से नुकसान
प्रगतिशील बागवानों में राकेश, सुंदर सिंह, बंसी लाल, पवन कुमार, राज मेहता, सूरज, छतर सिंह, घनश्याम, देवेंद्र कुमार, रोशन लाल, चरण दास, रूप सिंह, तारा चंद, श्याम मुरारी, गोवर्धन और भगत सिंह ने बताया कि ग्रामीण आर्थिकी का स्रोत कृषि बागवानी और पशुपालन पर निर्भर रहता है। हर साल प्रकृति की चौतरफा मार के चलते लाखों करोड़ों की कृषि बागवानी को भारी नुकसान पहुंचता है। राजस्व और बागवानी विभाग प्रशासन के आदेशों के अनुरूप नुकसान का आकलन करता आया है, लेकिन हकीकत बयां करती है कि आज तक कभी भी किसानों बागवानों को सरकार और विभाग की तरफ से नुकसान के एवज में राहत राशि मुहैया नहीं हुई। केवल मात्र कागजों के फेर में ही सरकारी प्रक्रिया दफन होकर सिमट जाती है।
नोग वैली के डंसा में तेज बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि। संवाद।