अब आनी विस क्षेत्र से जलोड़ी जोत और बागा-सराहन ही शामिल
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जलोड़ी जोत के लिए निर्माणाधीन पेयजल योजना लटके जाने से उठे सवाल
हरिकृष्ण शर्मा
आनी (कुल्लू)। प्रदेश सरकार ने विकसित की जा रहीं 77 ईको टूरिज्म साइटों की टेंडर प्रक्रिया में कुल्लू जिला के आनी उपमंडल की तीन साइटों को शामिल किया था। इनमें जलोड़ी जोत, ऐतिहासिक रघुपुर गढ़ और बागा-सराहन प्रमुख थे। अब रघुपुर क्षेत्र के युवाओं के विरोध प्रदर्शन के चलते रघुपुर गढ़ को ईको टूरिज्म साइट से बाहर कर दिया है। अब केवल जलोड़ी जोत और बागा-सराहन साइटों के लिए ही ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया चल रही है, जो शिमला से संचालित हो रही है। जलोड़ी पास में डेढ़ हेक्टेयर भूमि को चिह्नित कर यहां ईको फ्रेंडली पर्यटन गतिविधियां शुरू करने की योजना है। हालांकि, इस महत्वाकांक्षी योजना के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बुनियादी सुविधाओं की कमी और पेयजल संकट है। जलोड़ी जोत क्षेत्र में कई दुकानें और होटल संचालित हैं। इनसे प्रति माह 20-20 हजार रुपये किराया वसूला जाता है, लेकिन पेयजल आपूर्ति की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। होटल संचालकों और स्थानीय लोगों को दो से तीन किलोमीटर दूर से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है, जिससे पर्यटकों में नकारात्मक संदेश जा रहा है। सफाई व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। रघुपुर गढ़ के लिए 1.20 करोड़ रुपये की लागत से करशालाबाग-रघुपुर गढ़ उठाऊ पेयजल योजना निर्माणाधीन है, लेकिन अब तक केवल 50 लाख रुपये ही जारी किए गए हैं। बजट की कमी के कारण ठेकेदार ने काम बीच में ही रोक दिया है। इससे न केवल स्थानीय लोग परेशान हैं, बल्कि पर्यटन विकास को भी नुकसान पहुंच रहा है। स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि पेयजल योजना के लिए शेष बजट तुरंत जारी किया जाए, ताकि ईको टूरिज्म की राह आसान हो सके और क्षेत्र में पर्यटन विकास को गति मिल सके। जल शक्ति विभाग के अधिशासी अभियंता ई. किशोर शर्मा ने बताया कि बजट मिलते ही योजना का कार्य पूरा किया जाएगा।
जनविरोध के कारण रघुपुर गढ़ को हटाया
डीएफओ लूहरी सीएल राव ने कहा कि जनविरोध के कारण रघुपुर साइट को टेंडर प्रक्रिया से हटाया गया है और अन्य साइटों के लिए डाटा तैयार कर शिमला भेजा जा रहा है।