. आरोप, बड़ी संख्या में पौधे बिना उचित क्वॉरेंटाइन के सीधे बेचे गए
. औपचारिकताएं केवल कागज़ों में पूरी दिखाई गईं
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)। बागवानों ने वर्ष 2025-26 में आयातित सेब के पौधों की क्वारंटीन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि बड़ी संख्या में पौधे बिना उचित क्वारंटीन के सीधे बेचे गए। बागवानों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। बागवान नरेश कुमार, तेजराम, कविंद्र, पदम दास और रविंद्र चौहान ने प्रक्रिया पर संदेह जताया है। उनका आरोप है कि अधिकांश पौधों को वास्तविक क्वारंटीन अवधि पूरी किए बिना ही बेच दिया गया। बागवानों का कहना है कि औपचारिकताएं केवल कागजों में पूरी दिखाई गईं। उन्होंने संबंधित स्थलों पर रिकॉर्ड और पौधों की उपलब्धता दर्ज करने की मांग की है। बागवानों ने यह भी आरोप लगाया कि पौधे बाहरी राज्यों से सीधे हिमाचल लाकर बगीचों में लगाए गए।आयातित पौधों का वितरण अक्सर बाहरी राज्यों में ही होता है। यह प्रक्रिया कई वर्षों से चली आ रही है। यह हिमाचल की बागवानी, पौध स्वास्थ्य और लाखों बागवानों की आजीविका से जुड़ा गंभीर विषय है। बागवानों के अनुसार, कालका, पंचकूला, अंबाला, पंजाब, हरियाणा और असम जैसे क्षेत्रों को क्वारंटीन स्थल बताया गया है। इन क्षेत्रों में व्यावसायिक स्तर पर सेब की खेती नहीं होती है। इन्हें क्वारंटीन के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। हिमाचल और उत्तराखंड जैसे सेब उत्पादक राज्यों में केवल दो-तीन स्थानों का ही उल्लेख है, जिससे प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।
हिमाचल में करीब 3.5 लाख पौधे ही किए आयात
उद्यान विभाग के निदेशक सतीश शर्मा ने बताया कि वर्ष 2025-26 में हिमाचल में लगभग 3.5 लाख सेब के पौधे ही आयात किए गए हैं। शर्मा ने 35 लाख पौधों के आयात की जानकारी से इन्कार किया। कहा कि यदि किसी अन्य राज्य में क्वारंटीन की अनुमति है, तो जानकारी संबंधित राज्य के पास होगी।