रिकांगपिओ में श्रम कानूनों का विरोध करती आंगनबाड़ी और आशा वर्कर।
- फोटो : RAMPUR-HP
रिकांगपिओ (किन्नौर)। रिकांगपिओ में बुधवार को श्रम कानूनों के विरोध में मजदूरों ने रोष रैली निकाली। जिले की आशा वर्कर, आंगनबाड़ी और मिड-डे मील वर्करों ने संयुक्त रूप से रिकांगपिओ बस अड्डे से मुख्य बाजार और रामलीला मैदान तक रोष रैली निकाली। मजदूरों ने उपायुक्त हेमराज बैरवा के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रम मंत्री संतोष गंगवार को ज्ञापन भी भेजा। उन्होंने श्रम नियमों में श्रमिक विरोधी संशोधनों और पुरानी पेंशन स्कीम को बहाल करने की मांग की।
रिकांगपिओ के रामलीला मैदान में भारतीय मजदूर संघ हिमाचल प्रदेश के तत्वावधान में महामंत्री मंगत राम नेगी ने वर्करों को संबोधित किया। नेगी ने कहा कि आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायकों और मिड-डे मील कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाना चाहिए। न्यूनतम वेतनमान 18 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाना चाहिए। उन्होंने 2003 के बाद के नियुक्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना के अंतर्गत लाने, ठेका मजदूरी में बिचौलियों को समाप्त करने और अनुबंध कर्मचारियों को नियमित करने की मांग रखी। कहा कि भारत सरकार की ओर से हाल ही में 29 श्रम कानूनों के स्थान पर 4 श्रम संहिता बनाकर लोकसभा और राज्यसभा से बिल पारित किए जाने का विषय भी राष्ट्रीय अधिवेशन में प्रमुखता का विषय रहा है। इस राष्ट्रीय अधिवेशन से जुड़े प्रतिनिधियों की सभा ने निर्णय लिया कि श्रम कोर्ट बनाया जाए। नेगी ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा कानून को मजबूत करने की बजाय उन्हें शिथिल किया गया है और ट्रेड यूनियन की मांगों को दरकिनार करते हुए उपरोक्त कई श्रमिक विरोधी संशोधन किए गए हैं, जिसका भारतीय मजदूर संघ कड़ा विरोध करता है। संघ ने केंद्र सरकार से श्रमिक को प्रभावित करने वाले प्रस्तावों को वापस लेने की मांग उठाई है। इस अवसर पर यशपाल हेटा, शीतल करोल, प्रेम लता, गीता देवी, छेरिंग आंगमो, कमला देवी, खेम पाल और राजेश्वरी सहित अन्य मौजूद रहे।