सांगला (किन्नौर)। ग्राम पंचायत उरनी और मनू के बीच निर्मित 12 मेगावाट रोरा लघु जलविद्युत परियोजना डीएलआई पावर इंडिया की ओर से 15 प्रतिशत पानी न छोड़ने पर क्षेत्र की तीन पंचायतों के बाशिंदों ने रोष जताया है। मीरू, उरनी और युला पंचायत के गुस्साए लोगों ने परियोजना को चेताया है कि अब ये पंचायतें ग्रीन ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाएंगी।
उरनी पंचायत प्रधान गीता ज्ञानी ने कहा कि 12 मेगावाट रोरा जलविद्युत परियोजना का निर्माण कार्य सितंबर 2019 को किया गया था। तब से लेकर अब तक डैम साइड से पावर हाउस साइट तक नदी को पूरी तरह से सुखा दिया गया है, जो परियोजना प्रबंधन की ओर से विद्युत नीति और परियोजना निर्माण के नियमों का उल्लंघन करना है। विद्युत परियोजना के निर्माण होने के बाद उस नदी को 15 प्रतिशत पानी छोड़ा जाना अनिवार्य है, लेकिन परियोजना केवल एक प्रतिशत पानी ही छोड़ रही है। इस संबंध में उरनी और मीरू पंचायत ने उपमंडल दंडाधिकारी भावानगर के माध्यम से कई बार इन प्रश्नों को उठाया, लेकिन आज दिन तक वह एक बूंद पानी नहीं छोड़ रहे हैं। रिकांगपिओ में आयोजित लाडा की बैठक में भी इन पंचायतों ने उपायुक्त किन्नौर को पानी न छोड़ने संबंधी शिकायतें की थी। उस बैठक में भी परियोजना अधिकारियों का कहना था कि पानी छोड़ा जा रहा है। परियोजना की ओर से पानी न छोड़े जाने के कारण स्थानीय पंचायतों के पशु-पक्षियों और पर्यावरण पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। वहीं, जब परियोजना यदि अपने कार्यों के चलते पानी छोड़ती है तो नदी के आसपास इसको लेकर सूचित नहीं किया जाता और न ही सायरन की व्यवस्था की गई है। कुछ समय पहले क्षेत्र का पशुपालक पुरुषोत्तम नेगी उरनी नदी के पास पशुओं को चरा रहा था। अचानक नदी में जलस्तर बढ़ा और पशुपालक अपनी भेड़-बकरियों के साथ नदी के बीच फंस गया था। प्रधान गीता ज्ञानी, वेद प्रकाश, राजकुमार, सुंदर कुमार नेगी, सीताराम नेगी, प्रवेश कुमार नेगी, सुमन सिंह नेगी, विमल सिंह नेगी, हरीश चंद्र नेगी, सत्यप्रकाश नेगी का कहना है कि परियोजना की ओर से नियमानुसार पानी नहीं छोड़ा जा रहा। अब इन पंचायतों के लोग मजबूरन गीन ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाएंगे।
उधर, डीएलआई परियोजना के डीजीएम मनोज कुमार साह ने कहा कि पानी छोड़ा जा रहा है। यह पानी नाले के अंदर ही रिस रहा है।