रिकांगपिओ (किन्नौर)। आयुर्वेदिक अस्पताल रिकांगपिओ के साथ एक दवाइयों की निजी दुकान वर्षों से बिना लाइसेंस के चल रही है। दवा विक्रेता एलोपैथिक दवाओं के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाएं बेच रहा है, जिसका उसके पास लाइसेंस नहीं है। इस संबंध में उपायुक्त किन्नौर, जिला आयुर्वेद अधिकारी और विभाग के सचिव को शिकायत भेजकर उचित कार्रवाई की मांग उठाई गई है।
उपायुक्त और आयुर्वेदिक विभाग को भेजी शिकायत में शिकायतकर्ता पूर्व प्रधान नेसंग अशोक नेगी, जिला परिषद सदस्य हितेश नेगी, पूर्व प्रधान ठंगी सत्यप्रकाश बोरस, पूर्व प्रधान कुन्नोचारंग पूर्ण सिंह नेगी, उप प्रधान रिब्बा कृष्णभगत नेगी ने कहा कि आयुर्वेदिक अस्पताल रिकांगपिओ के साथ एक निजी दवा विक्रेता वर्षों से बिना लाइसेंस के आयुर्वेदिक दवाएं बेच रहा है।
उक्त दवा विक्रेता के पास केवल एलोपैथिक दवाएं बेचने की मंजूरी है, लेकिन यह आयुर्वेदिक दवाएं भी बेच रहा है। यह सीधे तौर पर कानून और नियमों की अवहेलना है। यह सिलसिला 17 वर्षों से चल रहा है। इस पर लगाम लगाना अति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बिना लाइसेंस दवाएं बेचना गैरकानूनी है।
उन्होंने उपायुक्त किन्नौर, आयुर्वेद अधिकारी और आयुर्वेदिक विभाग के सचिव से उक्त दवा विक्रेता पर कार्रवाई करने और लाइसेंस न होने तक आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की है।
जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. इंदु शर्मा ने बताया कि विभाग को एक दवा की दुकान में बिना लाइसेंस के आयुर्वेदिक दवाएं बेचने की शिकायत मिली है। विभाग की टीम ने दवा विक्रेता के कागजों की जांच की और पाया कि उसके पास बीते कई वर्षों से लाइसेंस नहीं है। हालांकि उसके पास एलोपैथिक दवाएं बेचने की मंजूरी है। उन्होंने दवा विक्रेता को सात दिन के भीतर लाइसेंस बनाने के निर्देश दिए हैं। संवाद