प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे बागवानों के लिए फल बचाना चुनौती
सुबह से शाम तक तोते और बंदरों को भगाने में जुटे
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। उपमंडल के प्लम बहुल क्षेत्रों में बागवानों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले प्राकृतिक आपदाओं ने फसल को नुकसान पहुंचाया और अब तोते और बंदर बची-खुची उम्मीदों पर भी पानी फेर रहे हैं।
इन दिनों बगीचों में तोते प्लम के तैयार फलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके अलावा बंदर पेड़ों और फलों दोनों को क्षति पहुंचा रहे हैं। पहले ही सर्दियों में सूखे और फ्लावरिंग के दौरान बेमौसमी बारिश, अंधड़ और ओलावृष्टि के कारण इस साल फसल कम है। ऐसे में अब जंगली जानवरों के हमलों ने बागवानों की चिंता और बढ़ा दी है।
स्थिति यह है कि बागवानों को सुबह से शाम तक बगीचों की निगरानी करनी पड़ रही है। वे दिनभर तोतों और बंदरों को भगाने में जुटे रहते हैं। इसके बावजूद फलों को पूरी तरह बचा पाना मुश्किल हो रहा है। बागवान राधाकृष्ण, सुरजीत, राकेश, सुरेंद्र, रंजीत, लायक राम और पुष्पेंद्र का कहना है कि तोते और बंदर प्लम के बगीचों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। जो थोड़ी बहुत फसल बची है, उसे भी सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती बन गया है।
बागवानों का कहना है कि मौसम की मार के साथ-साथ जंगली जानवरों के हमलों ने उनकी आर्थिकी पर गहरा असर डाला है। सालभर की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है और परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। बागवानों ने सरकार से नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने और जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए ठोस उपाय करने की मांग उठाई है।