रामपुर बुशहर। कोविड-19 कोरोना संक्रमण के दौर में देश भर में अधिकतर मजदूर पलायन कर चुके हैं। वहीं अब रामपुर उपमंडल में मजदूर न मिलने से प्लम का सीजन प्रभावित हो रहा है। बागवानों को मजदूरों की खासी कमी खल रही है। ऐसे में महिलाएं अपना चूल्हा-चौका निपटा कर प्लम सीजन में जुट गई हैं। उपमंडल के खखरोला गांव में 77 वर्षीय केसरी ठाकुर प्लम सीजन में कार्य कर महिला सशक्तीरण का संदेश दे रही हैं।
गौरतलब है कि उपमंडल के विभिन्न क्षेत्रों में इन दिनों प्लम का सीजन जोर शोर से चल रहा है। पूर्व में बागवानों की प्लम की फसल को तोड़ने से लेकर उसे मंडी तक पहुंचाने का जिम्मा मजदूरों का रहता था। बाहरी राज्यों से मजदूर भारी संख्या में पहुंचकर प्लम सीजन को निपटाते थे, लेकिन इस वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण उपमंडल के अधिकतर क्षेत्रों से मजदूर पलायन कर अपने घर लौट चुके हैं, जबकि बाहरी राज्यों से अब तक एक भी मजदूर प्रदेश में नहीं पहुंचा है। ऐसे में प्लम सीजन को निपटाना बागवानों के लिए खासी चुनौती बना हुआ है। अब बागवानों के परिवार के सभी सदस्य प्लम तोड़ने, पैकिंग और ग्रेडिंग का कार्य करने में जुटे हुए हैं। यही नहीं, अब पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी प्लम सीजन को निपटाने में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं। पुरुषों ने जहां प्लम तुड़ान का जिम्मा संभाला है, वहीं महिलाएं पैकिंग और ग्रेडिंग के कार्य में जुटी हुई हैं। ग्रामीण स्वयं ही अपनी फसलों का तुड़ान और उसे मंडी पहुंचाने की व्यवस्था कर रहे हैं। बागवान राज ठाकुर, आनंद नेगी, सुरेंद्र कुमार, हेमराज, बबलू नेगी, हर्ष कायथ, देवेंद्र सिंह, राधाकृष्ण, विजय राणा, कुलवंत ठाकुर सहित अन्य बागवानों ने कहा कि इस वर्ष कोरोना महामारी के चलते प्लम सीजन के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में परिवार के सभी सदस्य एकत्रित होकर फसल तोड़ने सहित मंडी पहुंचाने में जुटे हुए हैं।