संवाद न्यूज एजेंसी
नेरवा (रोहड़ू)। नेरवा जल शक्ति डिवीजन में लंबे समय से कार्यालय और फील्ड कर्मियों के पद खाली चल रहे हैं। इस कारण सिंचाई और पेयजल योजनाओं की सही से देख-रेख नहीं हो पा रही है। वहीं, लोगों पेयजल किल्लत का भी सामना करना पड़ रहा है। नेरवा मंडल में लंबे समय से 155 पद खाली चल रहे हैं। रिक्त पड़े पदों में नियुक्तियां न होने के कारण अधिकतर पेयजल और सिंचाई योजनाएं सुचारु रूप से कार्य नहीं कर पा रही हैं। नेरवा जल शक्ति मंडल में कुल 370 पद स्वीकृत हैं, जिनमें 155 यानी 42 प्रतिशत रिक्त हैं। फील्ड स्टाफ के कुल स्वीकृत 317 पदों में 128 यानी 40 प्रतिशत और ऑफिस स्टाफ के 53 में से 27 अर्थात 51 प्रतिशत खाली हैं। फील्ड स्टाफ में सबसे अधिक खाली पद फीटर और बेलदारों के हैं। नेरवा जलशक्ति उपमंडल में फीटर के सभी 15, कुपवी उपमंडल में 10 में तीन और चौपाल उपमंडल में 15 में से 14 पद खाली चल रहे हैं, जबकि पेयजल योजनाओं के संचालन का जिम्मा इनके ऊपर ही रहता है।
बेलदारों के नेरवा उपमंडल में 79 से 30, कुपवी में 50 से 36 पद खाली हैं, वहीं अन्य रिक्तियों में वर्क इंस्पेक्टर के 12 में से 9, फोरमैन के 2, पंप ऑपरेटर के 2, कंपलेट अटेंडेंट के 2 ,सर्वेयर के 4, चौकीदारों के 3 और पंप अटेंडेंट के 16 पद खाली हैं। इसके अलावा कनिष्ठ अभियंताओं के 6 पद एक वरिष्ठ सहायक का पद भी रिक्त हैं। लोगों का कहना है कि स्टाफ की कमी के कारण फील्ड में काम कर रहे लोगों को अतिरिक्त बोझ झेलना पड़ रहा है। कई पेयजल योजनाएं रख-रखाव के अभाव में दम तोड़ चुकी हैं। लोगों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। लोगों ने सरकार से रिक्त पड़े पदों को शीघ्र भरने की गुहार लगाई है।