संवाद न्यूज एजेंसी सांगला (किन्नौर)। जिला किन्नौर अपनी देव संस्कृति और पारंपरिक गतिविधियों के लिए देश भर में जाना जाता है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बसे देवी-देवताओं से संबंधित कई परंपराएं सदियों से कायम हैं। आज भी ग्रामीण इन देव परंपराओं का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन करते हैं। इसी कड़ी में वीरवार को जिले की ख्वांगी पंचायत के देवता मरकारिंग अपने देवलुओं और ग्रामीणों के साथ करीब दस वर्ष बाद ख्वांगी कंडा पहुंचे। यहां अब अगले दो दिन तक देव परंपरा अनुसार मेला सजेगा और नाच गानों का खूब दौर चलेगा। गौर हो कि किन्नौर जिले की ख्वांगी पंचायत के देवता मरकारिंग अपने कार करिंदों और ग्रामीणों के साथ दस वर्ष बाद जापरोदेन कंडा पहुंचे। देवता संग सुबह ही ग्रामीण और देवताओं के कार करिंदे कंडे की ओर रवाना हुए। दोपहर से पूर्व देवता और कार करिंदे कंडे में पहुंचे। यहां सदियों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करते हुए देवता और कार करिंदों ने कंडे पहुंचकर पूजा पाठ की और गांव की सुख-समृद्धि का आह्वान किया। यहां पहुंचकर सावनियों (परियां) की पूजा की। इसके बाद यहां नाच गाने का खूब दौर चला। दिन भर वाद्ययंत्रों की धुनों पर ग्रामीण नाचते गाते रहे। शुक्रवार को सभी देवता संग वापस ख्वांग गांव पहुंचेंगे। इस मौके पर पुजारी मुकेश नेगी, माथास अशोक नेगी, माली भगत राम नेगी, शांति स्वरूप पंचारस सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
लंबी अवधि के बाद देवता कंडे पहुंचे
देवता मरकारिंग के मोतमीन दीपक नेगी, पुजारी देवराज ने बताया कि इस वर्ष की लंबी अवधि के बाद देवता कंडे में पहुंचे हैं। यहां सदियों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन किया गया। अब शुक्रवार को ग्रामीण सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लेकर वापस ख्वांगी गांव पहुंचेंगे।