रिकांगपिओ(किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर में ग्रामीणों के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) वरदान साबित हुई है। इस योजना से न केवल क्षेत्र में विकास के नए आयाम स्थापित हुए हैं, बल्कि ग्रामीणों की आमदनी में भी इजाफा हुआ है। कोविड-19 महामारी ने जहां समस्त विश्व को विवश कर दिया है, वहीं हर प्रकार की गतिविधियों पर विराम भी लगा दिया था।
कोरोना संक्रमण के कारण किन्नौर में विकास कार्यों पर रोक लग गई थी। केंद्र सरकार ने गत माह मनरेगा कार्यों को आरंभ करने का निर्णय लिया था। इसके बाद जिले के हजारों लोगों ने काफी राहत पाई। इस निर्णय ने प्रदेश के ग्रामीणों को सहारा दिया है। मनरेगा के तहत कुल 65 में से 61 पंचायतों में विकास कार्य आवंटित किए गए हैं। जहां कार्य पूरे जोरों पर चल रहे हैं और लोगों को घरों के समीप रोजगार प्रदान किया जा रहा है। कुल 785 विकास कार्य प्रगति पर हैं, जिनमें कार्य करने वाले 6931 श्रमिक समय पर मजदूरी की राशि के भुगतान के लिए सरकार के आभारी हैं। भौगोलिक विशेषताओं के कारण मनरेगा के तहत जनजातीय क्षेत्रों में मानदेय 248 रुपये प्रतिदिन है, जबकि राज्य के शेष भागों में यह राशि 198 रुपये प्रतिदिन है। जिला किन्नौर ग्रामीण विकास एजेंसी की उपनिदेशक और परियोजना अधिकारी जयवंती नेगी ने कहा कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में 678327 कार्य दिवस का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा, जिले को 7918.05 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। वर्तमान में किन्नौर में 19,173 जॉब कार्ड धारक हैं।