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Rampur Bushahar News: दो महीने से नहीं मिली दूध की पेमेंट, अब 30 प्रदर्शन करेंगे दुग्ध उत्पादक

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रामपुर में प्रेसवार्ता करते दुग्ध उत्पादक संघ के पदाधिकारी। संवाद
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मिल्कफेड से भुगतान नहीं होने पर रोष, खंड स्तर पर होगा धरना-प्रदर्शन
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14 अक्तूबर को एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौंपेंगे ज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी

रामपुर बुशहर। दुग्ध उत्पादकों को अगस्त और सितंबर का भुगतान नहीं हुआ है। दो महीने से दूध की पेमेंट न मिलने से हजारों दुग्ध उत्पादक परेशान हैं। अब दुग्ध उत्पादक 30 अक्तूबर को खंड स्तर पर धरना-प्रदर्शन करेंगे। यह बात रविवार को हिमाचल दुग्ध उत्पादक संघ के संयोजक प्रेम चौहान ने रामपुर में प्रेस वार्ता में कही। उन्होंने कहा कि 14 अक्तूबर को खंड स्तर पर एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया जाएगा। इसके बाद 30 अक्तूबर को खंड स्तर पर धरना-प्रदर्शन किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि दूध उत्पादन से जुड़ा वर्ग अधिकतर गरीब और मध्यमवर्गीय किसान है। इनकी आजीविका का प्रमुख साधन दूध पर निर्भर है, लेकिन सरकार और मिल्कफेड की ओर से दो महीने से दूध का भुगतान नहीं किया गया है। इस कारण इन परिवारों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। हिमाचल प्रदेश में दुग्ध उत्पादकों को अपनी मेहनत के पैसे नहीं मिल रहे हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट खड़ा हो गया है। त्योहार के सीजन में लोग दूध के पैसे का इंतजार करते-करते थक गए। अधिकतर त्योहार नवरात्र, दशहरा, करवा चौथ बीत गया, लेकिन अभी तक दूध का पैसा गरीब किसानों के खाते में नहीं आया। गरीब किसानों को चूल्हा-चौका चलाना मुश्किल हो गया है। चारा, दवाइयों और पशु देखभाल की बढ़ती लागत ने हालात और भी कठिन बना दिए हैं। कई पशु पालक तो मजबूरी में दूध सप्लाई बंद करने और अपने पशुओं को बेचने तक की सोच रहे हैं। यह स्थिति न केवल पशुपालकों के लिए, बल्कि पूरे दुग्ध उत्पादन तंत्र के लिए चिंताजनक है। सरकार को चाहिए कि समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द दूध का बकाया भुगतान करे ताकि गरीब दुग्ध उत्पादकों को राहत मिल सके। इस मौके पर रामपुर खंड के अध्यक्ष तुला राम शर्मा, ननखड़ी खंड के अध्यक्ष दीप कनैन और सुभाष ठाकुर मौजूद रहे।
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दत्तनगर मिल्कफेड में रोजाना आता है 1.60 लाख लीटर दूध

दत्तनगर मिल्कफेड के रोजाना 1.60 लाख लीटर दूध पहुंचता है। 300 से ज्यादा को-ऑपरेटिव सोसायटियां बनी हुई हैं। प्रेम चौहान ने कहा कि सरकार निजीकरण की ओर जा रही है और दुग्ध उत्पादकों की सुध नहीं ले रही है। बागवानी के बाद अब पशुपालन भी संकट में है। यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले समय पर उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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