ब्रौ(रामपुर बुशहर)। मिड डे मील वर्कर्स यूनियन संबंधित सीटू ब्लॉक कमेटी निरमंड की बैठक लोनिवि विश्राम गृह निरमंड में आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें मिड डे मील वर्कर के लिए 25 बच्चों की शर्त को हटाने, स्कूलों में बच्चों के लिए तुरंत खाना बनाने और वर्करों को न्यूनतम वेतन देने की मांग का मुद्दा खूब गरमाया।
सीटू नेता देवकी नंदन, परसराम, अमित, सनी, यूनियन अध्यक्ष तिलका ठाकुर और महासचिव सत्या ने कहा कि देश की मोदी सरकार ने देश की उत्पादन करने वाली शक्तियों पर तीखे हमले जारी रखे हैं। मजदूरों के श्रम कानूनों को खत्म किया जा रहा है। देश की सरकार की नवउदारवादी नीतियों के चलते देश की जनता का जीवन संकट में चला गया है और महंगाई लगातार बढ़ रही है, जिससे आम जनता का जीवनयापन करना मुश्किल हो गया है। बेरोजगारी ने पिछले 45 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार मिड डे मील के मजदूरों को न्यूनतम वेतन न देकर मोदी सरकार इस योजना को कारपोरेट दोस्तों के हवाले करना चाहती है।
उन्हाेंने कहा कि मिड डे मिल वर्करों के साथ सरकार सौतेले व्यवहार कर रही है। राज्य में मिड डे मील वर्करों को 2600 रुपये मिलते हैं, वह भी समय पर नहीं मिल रहे हैं। महंगाई के दौर में यह मानदेय बहुत कम है। प्रदेश में कई स्कूल बंद कर दिए गए हैं और वर्कर्स का रोजगार छीना जा रहा है। यूनियन ने सरकार से मांग की कि मिड डे मिल वर्कर को न्यूनतम वेतन 9 हजार रुपये दिया जाए।
10 माह की जगह 12 महीने का वेतन देने, 4 महीने का बकाया वेतन तुरंत देने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 रद्द करने, स्कूल मर्ज होने या बंद होने की स्थिति में मिड डे मिल कुक को प्राथमिकता के आधार पर अन्य सरकारी स्कूलों में समायोजित करने की मांग उठाई है। बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि यूनियन की मांगे नहीं मानी गई तो प्रदेश सरकार के खिलाफ निरमंड में प्रदर्शन किया जाएगा। इस बैठक में रामपाल, गंगा ठाकुर, सुमति देवी, सोना देवी, दीवान चंद, रमेश, रामदास, रंजना, मीना देवी, सुरमा देवी, उषा देवी, महेंद्र पाल, मनमोहन, गोपाल और विरमा देवी सहित अन्य मौजूद रहे।