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Rampur Bushahar News: हरियाणा की तर्ज पर मिले मिड-डे मील वर्करों को वेतन

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कामगारों का शोषण कर रही है केंद्र सरकार : यूनियन
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निरमंड में कार्यकर्ताओं ने बैठक कर तैयार की आगामी रणनीति
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन (संबंधित सीटू) ब्लॉक इकाई निरमंड की बैठक यूनियन अध्यक्ष तिलका ठाकुर की अध्यक्षता में किसान मजदूर भवन निरमंड में हुई। बैठक में जहां विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर मंथन किया गया, वहीं केंद्र सरकार के खिलाफ रोष जताया गया।
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सीटू जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह और सचिव अमित ने कहा कि केंद्र सरकार पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए मिड-डे मील योजना का निजीकरण करने की कोशिश कर रही है, जबकि देश बढ़ते कुपोषण और भुखमरी का सामना कर रहा है। केंद्र सरकार 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुसार मिड-डे मील मजदूरों को मजदूर का दर्जा देने, पेंशन, ग्रेच्युटी और स्वास्थ्य आदि सुविधाओं को लागू नहीं कर रही है और वहीं हिमाचल सरकार भी कामगारों का शोषण कर रही है। बैठक में यूनियन ने सरकार से मांग उठाई है कि मिड-डे मील कार्यकर्ताओं का न्यूनतम वेतन हरियाणा की तर्ज पर 7000 रुपये किया जाए। मिड-डे मील कार्यकताओं को मजदूर का दर्जा देने, हिमाचल उच्च न्यायालय के 31 अक्तूबर, 2019 के निर्णय अनुसार 10 महीने के बजाए 12 महीने का वेतन देने, 45वें श्रम सम्मेलन अनुसार मजदूर का दर्जा, न्यूनतम वेतन, छुट्टियां, ग्रेच्युटी, पेंशन एवं सामाजिक सुरक्षा देने की मांग रखी। वहीं पंजाब सरकार की तर्ज पर छुट्टियां देने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 रद्द करने, स्कूल मर्ज होने या बंद होने की स्थिति में मिड-डे मील वर्करों को प्राथमिकता के आधार पर अन्य सरकारी स्कूलों में समायोजित करने और मिड-डे मील योजना का किसी भी रूप में निजीकरण न करने की मांग उठाई है। वहीं यूनियन ने चेताया है कि यदि मांगों पर गौर नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। बैठक में बबलू, सूरमा, तीर्था, पुष्पा, इंदिरा, किरना, गोपाल ठाकुर, अंजना देवी, सुमित्रा देवी, सोना देवी, लाल चंद, चेत राम और चिंता देवी सहित अन्य मौजूद रहे।
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