शिवदासी की पनीरी और आंवले के दीवाने हैं आनी वासी
हरिकृष्ण शर्मा
आनी(कुल्लू)। पनीरी ले लो पनीरी, बस यह आवाज सुनते ही आनी के लोग जान जाते हैं कि शिवदासी पनीरी लेकर आ गई है। घर में जमीन का अभाव और आय का कोई साधन न होने के चलते शिवदासी ने अपनी आर्थिकी को मजबूत करने के लिए योजना तैयार की, जिससे ताउम्र परिवार को पैसों के लिए दर-दर न भटकना पड़े। बिना किसी शर्म के आखिर शिवदासी ने घर-घर पनीरी बेचने का मन बनाया। आनी खंड की कुंगश पंचायत की रहने वाली 45 वर्षीय शिवदासी पिछले 15 साल से घर-घर जाकर विभिन्न किस्मों की पनीरी उगाकर उसे बेच अपनी आर्थिकी को मजबूत बना रही है। इसके अलावा वह प्रत्येक सीजन में वनों से आंवले इकट्ठे कर बेचती है। इतना ही नहीं जंगल से झाड़ू की सामग्री इकट्ठा कर झाड़ुओं को सुंदर बनाकर भी घर-घर बेचती है। इस कार्य में शिवदासी के पति भी मदद करते हैं, जबकि बेचने का कार्य स्वयं शिवदासी करती है।
शिवदासी का कहना है कि उनके पास इतनी जमीन नहीं है कि वो कुछ और काम कर सकें, इसलिए उन्होंने इस रास्ते को अपनाया है। इससे उनके आय के साधनों में इजाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि उन्हें घर-घर पनीरी बेचने में कोई शर्म नहीं है। उनका कहना है कि बुरे काम की शर्म होती है। मेहनत करके पैसे कमाने में वह अपना अभिमान समझती है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा उन्होंने घर में तीन गाय भी पाल रखी हैं। सड़क दूर होने के चलते वह दूध नहीं बेच पाती, जिसके बदले वह दूध का पनीर बनाकर भी बेच लेती है, जिससे उनकी आमदनी में भी बढ़ोतरी होती है। उन्होंने कहा कि वे बहुत मेहनत कर यह सभी कार्य को अंजाम देती है। शिवदासी की एक बेटी है, जो स्कूल में पढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पिछले 15 साल से वह आनी के हर क्षेत्र में पनीरी, आंवले और झाड़ू बनाकर बेच चुकी है, इसलिए अब सभी उनसे परिचित हैं। -संवाद