मंडियों में पहुंचने से पहले खराब हो रही नकदी फसलें
संवाद न्यूज एजेंंसी
नेरवा (रोहड़ू)।
सरकार प्रदेश भर में सड़कों का जाल बिछा रही है। हर गांव को सड़क सुविधा से जोड़ा जा रहा है ताकि जिंदगी आसान हो जाए। वहीं, शिमला जिले के दुर्गम क्षेत्र नेरवा के दो गांव ऐेसे हैं, जहां आज दिन तक सड़क ही नहीं बनी। यहां खच्चरों के सहारे दो गांवों की जिंदगी चल रही है। ग्रामीण बाहर से जरूरत की वस्तुएं लाने के लिए और गांवों के उत्पाद बाहर ले जाने के लिए खच्चरों पर ही निर्भर है। नेरवा तहसील की हलाऊ पंचायत के लोहाण और चौड़ बस्ती गांव में 37 घरों की करीब 200 आबादी के लिए सड़क सुविधा न होने के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों को अपने उत्पाद मंडियों तक पहुंचाने और बाहर से सामान घर तक पहुंचाने में परेशानी झेलनी पड़ती है। चौड़ बस्ती गांव के एक निवासी कुलदीप ने बताया कि इन दोनों गांवों के अधिकांश लोग कृषि और बागवानी पर आश्रित हैं। सेब, मटर, टमाटर और आलू की फसलें उगाकर जीवन यापन करते हैं, लेकिन सड़क की सुविधा न होने के कारण उन्हें अपने उत्पाद खच्चरों पर ढोकर सड़क तक पहुंचाने पड़ते हैं। इस पर बहुत अधिक लागत आती है और समय भी अधिक लगता है। कई बार समय पर खच्चरे नहीं मिलने पर उत्पाद खेतों में ही सड़ जाते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क तक पहुंचने के लिए करीब साढ़े तीन किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। इससे लोगों का करीब एक घंटे का समय लग जाता है। यदि पीठ पर सामान हो तो दो घंटे भी सफर में लग जाते हैं।
सरकार ने नहीं की पहल
हलाऊ पंचायत की प्रधान पिंकी चौहान, वार्ड सदस्य उपमा, कुलदीप, नरेंद्र चौहान, हीरा सिंह, लच्छी राम, सुरेंद्र सिंह, सुंदर सिंह, राम लाल और बालक राम ने कहा सरकार से कई बार आग्रह किया गया, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से इसके लिए पहल नहीं की जा रही। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह से मांग की है कि लोहाण और चौड़ बस्ती को प्राथमिकता के आधार पर सड़क से जोड़ा जाए। सड़क बनने से ग्रामीणों की सालाें से चली आ रही समस्याओं का समाधान होगा। साथ ही उन्हें आवाजाही करने में परेशानी नहीं झेलनी पड़ेंगी।