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मेला मैदान पहुंचा पहाड़ों का जहाज चामुर्थी घोड़ा

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पाटबंगला मैदान में लगी अश्व प्रदर्शनी में पहुंचे घोड़े। - फोटो : RAMPUR-HP
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रामपुर बुशहर। पहाड़ का जहाज कहे जाने वाला दुनिया का मशहूर चामुर्थी घोड़ा लवी मेला से पहले ही पाटबंगला मैदान में पहुंच गया है। लवी मेला में हर साल इस नस्ल के घोड़ों की प्रदर्शनी लगती है। हिमाचल ही नहीं उत्तराखंड और उत्तरांचल से भी खरीदार यहां पहुंचते हैं। सोमवार को 47 हजार रुपये में घोड़ा बिका। किन्नौर, लाहौल-स्पीति और अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों से घोड़े रामपुर मेला मैदान में पहुंचते हैं। इनमें बिकने वाले सबसे अच्छी नस्ल के चामुर्थी घोड़े होते हैं। इन घोड़ों को अंतरराष्ट्रीय लवी मेले की शान माना जाता है।
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किन्नौर और स्पीति से पहुंचे अश्व पालक पदम सिंह, जगदीश नेगी और आमी चंद ने बताया कि इस वर्ष मेले में 80 के करीब चामुर्थी घोड़े पहुंचे हैं। अब तक सबसे मंहगा घोड़ा 47 हजार रुपये में बिका है। हालांकि अभी मैदान में अन्य घोड़े भी बिकने को तैयार हैं। चामुर्थी घोड़ा शीत मरुस्थल का जहाज माना जाता है। कम तापमान और अधिक भार ढोने की क्षमता रखने वाला यह घोड़ा खरीदारों की पहली पसंद माना जाता है। हर वर्ष हिमाचल सहित उत्तराखंड, उत्तरांचल से खरीदारों के अलावा आईटीबीपी की ओर से इन घोड़ों की खरीद की जाती है।
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एक बार में एक क्विंटल वजन उठाने की रखता है क्षमता
चामुर्थी घोड़ा मध्यम ऊंचाई वाला होता है। यह कंपकंपाती ठंड में भी खुले आसमान के नीचे रह सकता है। चामुर्थी घोड़ा पहाड़ों के उबड़ खाबड़ रास्तों में भी काफी रफ्तार से चलता है। भार ढोने की क्षमता में भी यह घोड़ा अन्य नस्लों के घोड़ों को मात देता है। एक चामुर्थी घोड़ा एक क्विंटल से अधिक भार ढोने की क्षमता रखता है। शून्य से भी नीचे के तापमान को आसानी से सहन करने वाला चामुर्थी घोड़ा मेले में आए खरीदारों की पहली पसंद बनता है।
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