रटने के बजाय गतिविधियों और खेलों के माध्यम से शिक्षा लेंगे बच्चे
लखनऊ में राष्ट्रीय कॉन्क्लेव से प्रशिक्षण लेकर लौटा शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल
नई शिक्षा नीति और निपुण भारत के तहत इसी शिक्षा सत्र से शुरू होगा काम
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और निपुण भारत मिशन के तहत अब बच्चों में रटने की आदत को दूर किया जाएगा। इसके तहत जिला शिक्षा विभाग सोलन ने एक पहल की है। इसमें सरकारी विद्यालयों में 9 वर्ष तक की आयु के प्रत्येक विद्यार्थी को आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान में सक्षम बनाने के लिए अब अल्फा पद्धति का सहारा लिया जाएगा।
इसका प्रशिक्षण लेने के लिए उप जिला शिक्षा अधिकारी प्राथमिक सोलन राजकुमार पराशर के नेतृत्व में जिले के 19 जेबीटी अध्यापकों और 3 खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल हाल ही में 8 से 9 मई को लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय एफएलएन कॉन्क्लेव में सम्मिलित हुआ। देवी संस्थान की ओर से आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर के शिक्षा विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं ने बच्चों के सीखने की क्षमता को तेज करने वाली रणनीतियों पर मंथन किया। अल्फा पद्धति एक ऐसी अभिनव शिक्षण प्रक्रिया है जो बच्चों को बिना किसी मानसिक बोझ के, खेल-खेल में भाषा और गणित की बुनियादी दक्षताओं में निपुण बनाती है। प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ में इस पद्धति के व्यावहारिक प्रशिक्षण नवाचारपूर्ण गतिविधियों और विद्यालय स्तर पर इसके सफल बनाने का अध्ययन किया। जिला स्तरीय टास्क फोर्स ने शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के दौरान पूरे जिले में इस पद्धति को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसमें कक्षा 1 से 3 तक के शत-प्रतिशत विद्यार्थियों में भाषा एवं गणित की दक्षता विकसित करना। जिला एवं खंड स्तर पर शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन, विद्यालयों में गतिविधि-आधारित और उत्साहजनक शिक्षण वातावरण का निर्माण, कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करने के लिए नियमित मूल्यांकन और फीडबैक सिस्टम शामिल रहेगा।
कोट
यह पहल सोलन के विद्यार्थियों के शैक्षिक भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित होगी। अल्फा पेडागॉजी न केवल बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाएगी, बल्कि उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए एक सक्षम नागरिक के रूप में तैयार करेगी।
रीता गुप्ता, शिक्षा उप निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा