. एमआईएस के तहत बेचे गए सेब की पेमेंट लेने की प्रक्रिया को जटिल बनाया
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. बागवानों की मांग, पेमेंट लेने की प्रक्रिया को बनाया जाए सरल संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)। मौसम की मार से जूझ रहे बागवानों के लिए एचपीएमसी के नए फरमान ने परेशानी बढ़ा दी है। एमआईएस के तहत बेचे गए सेब की पेमेंट लेने की प्रक्रिया को जटिल बना दिया गया है। एचपीएमसी की ओर से एमआईएस-2025 के तहत फल रसीदों के भुगतान को लेकर लागू किए गए नए मापदंडों से बागवान चिंतित हैं। एचपपीएमसी के दिशा-निर्देशों में सेब की पेमेंट लेने के लिए राजस्व कागजात, भूमि स्वामित्व की विस्तृत छानबीन, घोषणा पत्र और अधिकृत व्यक्ति के माध्यम से सामग्री लेने जैसी शर्तें रखी गई हैं। बागवानों का सवाल है कि यदि छानबीन की प्रक्रिया इतनी लंबी और जटिल होगी, तो क्या जांच पूरी होते ही उनका तुरंत भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। सेब सीजन बीत चुका है और अब खाद, स्प्रे ऑयल और अन्य बागवानी सामग्री की सख्त जरूरत है, लेकिन न तो समय पर भुगतान मिल रहा है और न ही एचपीएमसी से सामग्री उपलब्ध हो पा रही है। मजबूरन बागवानों को महंगे दामों पर बाजार से खरीद करनी पड़ रही है।
स्थानीय बागवानों जतिंद्र चौहान, भगत राम, शेर सिंह ठाकुर और जगदीश चौहान का कहना है कि हर मापदंड केवल बागवानों पर ही थोपा जा रहा है। वर्षों से बागवान सरकारी योजनाओं के तहत फल आपूर्ति करते आ रहे हैं, फिर अचानक उन पर संदेह क्यों। बागवानों का कहाना है कि धोखाधड़ी रोकने के नाम पर ईमानदार किसानों को ही कटघरे में खड़ा किया जा रहा है। घोषणा पत्र और रसीदों की जांच के प्रावधानों पर भी सवाल उठ रहे हैं। बागवान पूछते हैं कि यदि किसी तकनीकी कमी या कागजी त्रुटि के आधार पर रसीदें रद्द की जाती हैं, तो उसकी भरपाई कौन करेगा। एक तरफ सरकार समय पर पैसे नहीं दे पा रही और दूसरी तरफ बागवानी सामग्री की आपूर्ति भी ठप है। ऐसे में बागवान आखिर करे, तो क्या करे। बागवानों का साफ कहना है कि सरकार को पारदर्शिता के साथ भरोसा भी दिखाना होगा। छानबीन जरूरी है, लेकिन उसका बोझ बागवानों पर डालकर भुगतान में देरी करना न्यायसंगत नहीं है। सरकार से मांग है कि जांच प्रक्रिया सरल की जाए, भुगतान की स्पष्ट समय सीमा तय हो और एचपीएमसी के माध्यम से आवश्यक सामग्री तुरंत उपलब्ध करवाई जाए।
सभी बागवानों के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है। क्योंकि कुछ मामलों में धोखाधड़ी के सामने आए थे। इस वजह से कुछ बागवानों को एमआईएस-2025 योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था, इसलिए पेमेंट के लिए बागवानों को राजस्व कागजात, भूमि स्वामित्व की विस्तृत रिपोर्ट, घोषणा पत्र और अधिकृत व्यक्ति के माध्यम से सामग्री लेने जैसी शर्तें रखी गई हैं।
अरिंदम चौधरी, प्रबंधन निदेशक एचपीएमसी