ओलावृष्टि से कूहल, देवठी, डंसा, लालसा और शिंगला पंचायत में फसलों को नुकसान
डंसा (रामपुर बुशहर)। जिला कुल्लू की जगातखाना पंचायत में जहां भारी बारिश और ओलावृष्टि से भारी तबाही मची, वहीं उपमंडल रामपुर की पांच पंचायतों में ओलावृष्टि ने किसानों-बागवानों की कमर तोड़कर रख दी है। सेब बहुल इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि ने बागवानों की वर्षभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। प्रभावित किसान-बागवान अब सरकार से मुआवजे के लिए टकटकी लगाए हुए हैं। इन बागवानों ने प्रदेश सरकार से फसलों को हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार कर राहत देने की गुहार लगाई है। उपमंडल रामपुर के अंतर्गत सेब बहुल क्षेत्रों 12/20, नोगवैली व आसपास लगते क्षेत्रों में शनिवार शाम को भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि ने सेब व अन्य नकदी फसलों पर कहर बरपाया। साढ़े छह बजे से करीब आधे घंटे तक हुई बारिश के दौरान 12/20 क्षेत्र की कूहल, देवठी और नोग वैली की डंसा, लालसा और शिंगला पंचायत के ऊपरी गांवों में भारी ओलावृष्टि हुई। ओलावृष्टि से सेब के दानों के साथ बीमे भी टूट गए, जबकि प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्राईकोटी माता मंदिर दारनघाटी से सटे इलाकों में भारी ओलावृष्टि हुई। नोगवैली के शिकारी काली माता मंदिर और जगूनी कराली डंसा, पनोली, सनेयी, शांदल, थाना, लालसा पंचायत में भी ओलावृष्टि हुई। इन क्षेत्रों में हर वर्ष करीब दस लाख सेब की पेटियों का उत्पादन होता है। बागवानों में ओलावृष्टि होने से खासी निराशा है। मौसम की मार से बागवानों के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। क्षेत्र के बागवान हर वर्ष प्राकृतिक आपदा से जूझने को मजबूर हैं। क्षेत्र के प्रगतिशील बागवान गोविंद, घनश्याम, श्याम मुरारी, यशपाल, हिम्मत सिंह, गोवर्धन प्रकाश, दिनेश, पवन, बंसी लाल, चतर सिंह, लायक राम सहित सैकड़ों बागवानों ने सरकार और बागवानी विभाग से ओलावृष्टि से हुई आर्थिक क्षति का जल्द आंकलन करने और बागवानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष सेब को तैयार करने में उन्हें भारी भरकम राशि खर्च करनी पड़ती है और प्रकृति की चौतरफा मार से उन्हें भारी परेशानी उठानी पड़ती है। सरकार और विभाग हर साल कागजों में रिपोर्ट तैयार कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। मुआवजे के नाम पर बागवानों को केवल आश्वासन ही मिलते हैं।
सेब
की फसल पर करें छिड़काव
रामपुर स्थित बागवानी प्रसार अधिकारी बलवंत मसोई ने ओलावृष्टि से सेब की फसल को हुए नुकसान से बचाव को लेकर आवश्यक छिड़काव की सलाह दी है। ओलावृष्टि के तुरंत बाद कार्बेन्डाजिम बाविस्टिन 100 ग्राम या मैंकोजेब 600 ग्राम लेकर 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। ओलावृष्टि के तीन चार दिन के अंदर बोरिक एसिड 200 ग्राम, जिंक सल्फेट 500 ग्राम, अनबूझा चूना 200 ग्राम को 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। दस से बारह दिन के अंतराल के बाद सूक्ष्म पोषक तत्वों जैसे एग्रो मिन मल्टीप्लेक्स या माइक्रो विट का 400 से 600 ग्राम प्रति दो सौ लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
- संवाद
जगातखाना के पास सरकारी डिपू में पानी घुसने से खराब हुआ आटा चावल और अन्य साम्रगी। संवाद
जगातखाना के पास सरकारी डिपू में पानी घुसने से खराब हुआ आटा चावल और अन्य साम्रगी। संवाद
जगातखाना के पास सरकारी डिपू में पानी घुसने से खराब हुआ आटा चावल और अन्य साम्रगी। संवाद