नेरवा (रोहडू)। वन विभाग का एक अधिकारी बीते दस माह से सरकारी रेस्ट हाउस में परिवार के साथ डेरा डाले बैठा है। आवासीय सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद सरकारी रेस्ट हाउस में अधिकारी के ठहरने की पूरे क्षेत्र में खूब चर्चा है। अधिकारी की सेवा और बच्चों की देखरेख के लिए भी वन विभाग का सरकारी कर्मचारी तैनात है। यही नहीं, बीच में अधिकारी प्रशिक्षण के लिए गए तो रेस्ट हाउस में तीन माह तक उन्होंने ताला लगा दिया था।
वन महकमे के इस अधिकारी ने 17 सितंबर 2019 को चौपाल वन मंडल में ज्वाइन किया। तीन अगस्त 2020 को इनका तबादला नाहन के लिए हो गया। चौपाल का कार्यभार भी इसी अधिकारी के पास है। इन्होंने आवासीय सुविधा होने के बावजूद दस माह से परिवार के साथ सरकारी रेस्ट हाउस को अपना ठिकाना बना रखा है। एक एमपीडबल्यू कर्मचारी बच्चे की देखभाल के लिए तैनात है। देइया वन परिक्षेत्र से भी एक महिला तैनात है। अधिकारी जब तीन माह के प्रशिक्षण के लिए गए तो रेस्ट हाउस के कमरे को ताला लगा दिया। जबकि सरकारी आवास उचित सुविधाओं से लैस है। इससे आम आदमी और सरकारी कर्मचारियों को रेस्ट हाउस की सुविधा नहीं मिल रही है। रेस्ट हाउस की लॉग बुक तक नहीं भरी जा रही है। रेस्ट हाउस के बचे कमरों को भी किसी को न देने की स्टाफ को हिदायत दी गई है। अपने स्टाफ के साथ बैठकें भी अक्सर रेस्ट हाउस में ही हो रही हैं।
मुख्य वन अरण्यपाल आरके गुप्ता ने बताया कि उनके संज्ञान में मामला नहीं है। मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाएगी। मामला सामने आया तो अधिकारी के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। वन मंडलाधिकारी चौपाल सौरभ जाखड़ से इसके बारे में बात की गई तो उन्होंने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकारी आवास रहने योग्य नहीं था। उन्हें मजबूरन रेस्ट हाउस में शरण लेनी पड़ी। विभागीय कर्मचारी को अपने निजी कार्य के लिए तैनात करने के आरोप को उन्होंने सिरे से खारिज किया है।