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Rampur Bushahar News: बागवान खाद का प्रयोग करने से पहले करवाएं मिट्टी की जांच

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सेब के बगीचों में रख-रखाव का काम शुरू, बगीचों से घास और झाड़ियों की सफाई में जुटे बागवान
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सेब के बगीचों में रख-रखाव का काम शुरू हो गया है। अभी बागवान बगीचों से घास और झाड़ियों की सफाई में जुटे हैं। इसके बाद बगीचों में तोलिए बनाने और खादों का इस्तेमाल किया जाता है। सेब के साथ अन्य फलदार पौधों को भी विभिन्न किस्मों के पोषक तत्वों की जरूरत रहती है। इन्हीं से पौधों की पर्याप्त वृद्धि होती है। लिहाजा, बागवानों को मिट्टी परीक्षण के बाद ही अपने बगीचे में पोषक तत्वों का इस्तेमाल करना चाहिए। बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरी पोषक तत्वों में कार्बन, हाईड्रोजन, नाइट्रोजन ऑक्सीजन, फास्फोरस, पोटाशियम, सल्फर, कैल्शियम और लोहा शामिल है। कुछ तत्व जैसे कॉपर, जिंक, मेग्नीज, क्लोरीन की भी थोड़ी मात्रा की आवश्यकता होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर इन पोषक तत्वों की कमी हो जाए, तो पौधों के विकास में प्रतिकूल असर पड़ता है। साथ ही फलों की पैदावार भी प्रभावित होती है। कार्बन, ऑक्सीजन तथा हाईड्रोजन को जहां पौधा हवा और पानी से खींच लेता है। अच्छी फसल की पैदावार के लिए इन पोषक तत्वों का छिड़काव किया जा सकता है।
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मिट्टी परीक्षण के बाद खाद डालें : डॉ. ऊषा
बागवानी विशेषज्ञ एवं कृषि विज्ञान केंद्र रोहड़ू की प्रभारी डाॅॅ़ ऊषा शर्मा का कहना है कि मिट्टी परीक्षण से खादों सहित विभिन्न पोषक तत्वों को बगीचों में सही मात्रा में डालना चाहिए। पत्ते झड़ने के बाद मिट्टी का जरूर परिक्षण करवाएं। ऐसा करने पर जमीन की उपजाऊ शक्ति भी बनी रहती है और पैदावार भी अच्छी होती है। उनका कहना है कि बागवानों को मिट्टी के परीक्षण के आधार पर ही बगीचों में खाद और पोषक तत्वों का प्रयोग करना चाहिए। ऐसा न करने पर एक ही तत्व अधिक हो जाता, जिससे पौधों में पोषक तत्व का संतुलन खराब हो जाता है।
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