संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल (रोहड़ू)। उपमंडल चौपाल के जंगल धू-धू कर जल रहे हैं। आग इतनी ज्यादा भयावह है कि बुझने का नाम ही नहीं ले रही है। जंगल में सूखी पत्तियां काफी तेजी के साथ आग पकड़ती हैं और चिंगारी मात्र से आग विकराल रूप धारण कर लेती है। जंगलों में लगी आग से चारों ओर धुआं फैलने से जहां बड़ी मात्रा में वन संपदा नष्ट हो रही है, वहीं इससे पर्यावरण दूषित होने के साथ-साथ लोगों को सांस लेने में भी परेशानी हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि शीतकाल में कम वर्षा और कम बर्फबारी के कारण भूमि और वातावरण में समय से पहले ही नमी समाप्त हो चुकी है, जिससे जंगलों में आग भड़क रही है। बारिश की कमी और तेजी से बढ़ते तापमान के कारण वनों में छोटे जलाशयों का अभाव होने से आग की घटनाएं बढ़ रही हैं। जंगलों का पूरी तरह सूखा होना आग लगने के खतरे को बढ़ा देता है। कई बार जंगलों की आग जब आसपास के गांवों तक पहुंच जाती है, तो स्थिति काफी भयानक हो जाती है। गर्मी की शुरुआत होते ही जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ने लगती हैं। सोमवार रात चौपाल मुख्यालय से दो किलोमीटर की दूरी पर मझोटली के पास जंगल में आग लग गई है और घड़ाला तक वन संपदा नष्ट हो गई है। शुष्क मौसम के कारण वातावरण में नमी कम होने से जंगलों के धधकने का सिलसिला जारी है। उपमंडल चौपाल में विभिन्न जगह भी जंगल धू-धू कर जल रहे हैं। आग से कई बागवानों के बगीचे उजड़ गए हैं और कई मवेशी जिंदा जल गए हैं।
जंगलों में आग लगाने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। जंगल की आग पर नियंत्रण केवल वन विभाग नहीं कर सकता। इसके लिए ब्लॉक और पंचायत स्तर पर समितियों का गठन किया जाए। राजस्व, पुलिस, चिकित्सा, लोक निर्माण विभाग, पंचायत प्रबंधन आदि अन्य विभागों से समन्वय बनाया जाए और अग्नि शमन विभाग का भी सहयोग लिया जाए। वन विभाग को भी निर्देश दिए कि आग लगाने वालों की जांच करें और दोषी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाएं।
- हेमचंद वर्मा, एसडीएम चौपाल