संवाद न्यूज ऐजेंसी
सांगला (किन्नौर)। जनजातीय जिले की समृद्ध संस्कृति के तहत किन्नौर जिले में विभिन्न त्योहार और पर्व मनाए जाते हैं। इसी कड़ी में निचार खंड के 14 दिवसीय फागुली उत्सव की भी अपनी एक अलग पहचान है।
19 फरवरी से शुरू हुए इस परंपरागत मेले को मनाने के लिए निचार खंड के लोगों में खासा उत्साह रहता है। निचार खंड के सभी 22 पंचायतों में इस विशेष त्योहार को विभिन्न तिथियों में आयोजित किया जाता है। वार्षिक पित्र सत्कार त्यौहार फागुली निचार खंड के करीब सभी ग्रामीण क्षेत्रों में शुकलपक्ष में मनाया जाता है।
गौर हो कि निचार खंड में 19 फरवरी से फागुली उत्सव शुरू हो गया है। ग्रामीणों ने 20 फरवरी को पुरानी शैली के अपने मकानों की लाल और सफेद मिट्टी से लिपाई पुताई की। इसके बाद 21 फरवरी को 7 प्रकार के अनाज से मोड़ियां बनाई गई।
22 फरवरी को मां उषा देवी के मंदिर में पूजा अर्चना का दौर चला। वहीं 26 फरवरी से 4 मार्च तक मां उषा देवी जी के मंदिर में किन्नौरी पारंपरिक वेशभूषाओं में सजधज कर ऐतिहासिक गानों के बीच ग्रामीणों ने नाटियों से खूब रंग जमाया। फागुली उत्सव के दौरान किन्नौरी गाना जोलेपा टीनीई, चू मौर छांग रंग बराबर गाने पर नाटी आकर्षण का मुख्य केंद्र रहती है।
नालचे सांस्कृतिक मंच निचार के अध्यक्ष राजपाल पायलैस नेग, पूर्व उपप्रधान वीरेंद्र नेगी ने कहा कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी फागुली उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। निचार खंड में फागुली उत्सव को लेकर लोगों में काफी उत्साह रहता है।