सुभाष सेन
रामपुर बुशहर। केंद्र और प्रदेश सरकार की मंजूरी मिलने के बाद भी रामपुर उपमंडल में ईएसआई डिस्पेंसरी खुलने का मसला ठंडे बस्ते में है। खनेरी अस्पताल प्रशासन के इन्कार के बाद भी ईएसआई डिस्पेंसरी खोलने के लिए स्थान चयनित नहीं हो पा रहा। इस कारण ढाई हजार से अधिक मजदूरों को ईएसआई योजना के तहत स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। विभिन्न परियोजनाओं, संस्थाओं, इंडस्ट्रीज और होटलों में कार्यरत मजदूरों को इस योजना के तहत उपचार के लिए वंचित रहना पड़ रहा है।
ईएसआई एक हेल्थ इंश्योरेंस योजना है। इस योजना के तहत निजी सेक्टर में काम कर रहे मजदूरों और कर्मचारियों को निशुल्क उपचार की सुविधा दी जा रही है। यदि काम के दौरान कोई भी कर्मचारी दुर्घटना का शिकार होता है, तो उसका उपचार ईएसआई योजना के तहत निशुल्क किया जाता है, जबकि उस कर्मचारी का परिवार भी इस योजना के दायरे में आता है। रामपुर में श्रम विभाग के पास पंजीकृत मजदूरों की संख्या ढाई हजार के पार है, लेकिन क्षेत्र में अब तक ईएसआई डिस्पेंसरी नहीं खुल पाई है। इस कारण निजी क्षेत्र में कार्य कर रहे कर्मचारी, मजदूरों को सरकारी या फिर प्राइवेट अस्पतालों में उपचार करवाने को मजबूर होना पड़ रहा है। केंद्र और प्रदेश सरकार की मंजूरी के बाद रामपुर के लिए ईएसआई डिस्पेंसरी स्वीकृत तो हुई, लेकिन अब तक स्थान का चयन न होने से डिस्पेंसरी नहीं खुल पाई। हालांकि, पूर्व में खनेरी अस्पताल प्रशासन से भी डिस्पेंसरी खोलने का मामला उठाया गया था, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने इसको लेकर साफ तौर पर इन्कार कर दिया। इसके बाद डिस्पेंसरी को झाकड़ी में खोलने के बारे में चर्चा हुई, लेकिन मामला अब तक सिरे नहीं चढ़ पाया है।
सरकार के समक्ष रखेंगे मांग
रामपुर में ईएसआई डिस्पेंसरी खोलने का मामला अभी प्रशासनिक दांव-पेच में फंसा है। डिस्पेंसरी रामपुर या झाकड़ी कहीं भी खुले, लेकिन खुलनी चाहिए। इस डिस्पेंसरी में निजी क्षेत्र के कर्मचारी, मजदूरों को 50 हजार केशलैस उपचार की सुविधा, जबकि परिवार सहित पांच लाख रुपये तक की उपचार सुविधा मिलेगी। डिस्पेंसरी खोलने की मांग जल्द ही प्रदेश सरकार के समक्ष उठाई जाएगी।
-बिहारी सेवगी, इंटक राज्य उपाध्यक्ष