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Rampur Bushahar News: सात साल से अपने भवन के इंतजार में जिला पुस्तकालय

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प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को पेश आ रही परेशानियां
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वन विभाग के भवन में चल रही लाइब्रेरी, न शौचालय और न ही कैंटीन


संवाद न्यूज एजेंसी

रिकांगपिओ (किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर में एकमात्र जिला पुस्तकालय सात साल से अपने भवन के इंतजार में है। ऐसे में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किन्नौर के दो पूर्व उपायुक्त गोपाल चंद और आबिद हुसैन सादिक ने स्थायी लाइब्रेरी भवन के लिए मिनी सचिवालय को निर्देश दिए थे, लेकिन अभी तक यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। जिला लाइब्रेरी में 45,000 पुस्तकों के साथ 100 अलमारी और अन्य सामान मौजूद है। वर्तमान में पुस्तकालय अस्थायी रूप से वन विभाग किन्नौर के गैंग हट भवन में दो-तीन छोटे-छोटे कमरे में चल रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहां न तो शौचालय की व्यवस्था है और न ही कैंटीन की सुविधा है। सर्दियों में बच्चे न के बराबर पहुंचते हैं, क्योंकि यह भवन जंगल के बीच बना है। सुविधाएं न होने के कारण बच्चे पढ़ाई से वंचित रह रहे हैं।
भवन बनाने के लिए साडा को जमा किए 7 लाख

रिकॉर्ड के मुताबिक दो सालों में 2023 और 2024 में 11,830 बच्चों ने पुस्तकालय में पढ़ाई की है। इस वर्ष 17 जून को कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी को इस सिलसिले में ज्ञापन भी दिया गया था। मंत्री ने इंडोर स्टेडियम के एक मंजिल में लाइब्रेरी भवन देने का आश्वासन दिया था। लाइब्रेरी भवन बनाने के लिए 7 लाख रुपये साडा को जमा किए हैं, लेकिन जिला प्रशासन अब आंबेडकर भवन को लाइब्रेरी भवन बना रहा है। मौजूदा शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थियों का मानना है कि मिनी सचिवालय को ही लाइब्रेरी भवन बनाना उचित रहेगा।
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उनके संज्ञान में 3-4 भवनों को लाइब्रेरी के लिए भवन बनाने का मामला है। एक इंडोर स्टेडियम, दूसरा आंबेडकर भवन है। इनके अलावा उप निदेशक शिक्षा विभाग की ओर से खाली किया गया मिनी सचिवालय के खाली कमरे के बारे में संबंधित विभागों से विचार-विमर्श किया गया है। - डॉ. अमित कुमार शर्मा, उपायुक्त किन्नौर


-पूह ब्लॉक के ठंगी गांव के जसवंत नेगी ने कहा है कि वह पिछले एक साल से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है। लाइब्रेरी जंगल में होने के कारण बसों से आने जाने में दिक्कतें पेश आ रही हैं। शौचालय और जलपान के लिए कैंटीन नहीं होने से दिक्कत है। पढ़ाई करने के लिए जगह की कमी है।
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- निचार ब्लॉक के छोटा कंबा के साहिल मैथड ने कहा कि वह डेढ़ साल से यहां प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा हूं। लाइब्रेरी कक्ष में पढ़ने के लिए जगह बहुत कम है। पढ़ाई के लिए कैबिन होने चाहिए। लाइब्रेरी में बेसिक सुविधा के अभाव के कारण पढ़ाई करना मुश्किल हो रहा है। सर्दियों में तो बहुत दिक्कत आती है।
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