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Rampur Bushahar News: मौसम में उतार-चढ़ाव से सेब बगीचों में बढ़ा माइट का खतरा

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विशेषज्ञ की राय बागवान सतर्क रहें, सप्ताह में दो बार करें बगीचे का निरीक्षण
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सेब बहुल क्षेत्रों में बदलते मौसम के बीच बगीचों में माइट के संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। पिछले दिनों तेज गर्मी, फिर बारिश और उसके बाद अचानक तेज धूप निकलने से माइट के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। बागवानी विशेषज्ञों ने बागवानों को समय रहते बगीचों का निरीक्षण करने और शुरुआती लक्षण दिखते ही नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार माइट अत्यंत सूक्ष्म कीट है जो पौधे, पत्तियों की निचली सतह पर रहकर उनका रस चूसता है। गर्म और शुष्क मौसम में इसका प्रकोप तेजी से बढ़ता है। बारिश के बाद जब तेज धूप निकलती है और वातावरण में उमस बढ़ती है, तब माइट तेजी से फैल सकता है। यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो यह सेब की फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों को प्रभावित करता है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि बागवान सप्ताह में कम से कम दो बार बगीचे का निरीक्षण करें। पत्तियों की निचली सतह पर लाल, भूरे या पीले काले रंग के छोटे-छोटे कीट दिखाई दें, पत्तियां पीली पड़ने लगें या उन पर धब्बे नजर आएं तो यह माइट संक्रमण का संकेत हो सकता है। अधिक प्रकोप होने पर पत्तियां खराब होने लगती हैं और पौधे की फंगस से फैलने वाले रोग के प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है।
माइट के कारण पेड़ों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया कमजोर पड़ जाती है, जिससे फल का आकार छोटा रह सकता है और रंगत पर भी असर पड़ता है। लंबे समय तक संक्रमण बने रहने से अगले वर्ष की फसल क्षमता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
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बागवानी विशेषज्ञ एवं कृषि विज्ञान केंद्र की प्रभारी डाॅ. उषा शर्मा ने बागवानोंं को सलाह दी है कि बगीचों में नमी संतुलित बनाए रखें। अनावश्यक रासायनिक दवाइयों का प्रयोग न करें, क्योंकि इससे मित्र कीट भी नष्ट हो जाते हैं। माइट की संख्या अधिक नजर आने के बाद आवश्यकता पड़ने पर कृषि एवं बागवानी विभाग की सलाह से अनुशंसित माइट नाशकों का ही प्रयोग करें। दवा का छिड़काव सुबह या शाम के समय करना बेहतर माना जाता है। उन्होंने किसी भी प्रकार के संक्रमण की स्थिति में तुरंत विशेषज्ञों से संपर्क करने की अपील की है।
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