कोटला ज्यूरी में देरची मेले में नाटी लगाते देवी-देवता और लोग। संवाद
देवताओं के आगमन से देवमय हुआ कोटला, नाटी ने बढ़ाई मेले की रौनक
मेले में दिन भर ढोल नगाड़ों की थाप पर चला नाटियों का दौर
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्यूरी (रामपुर बुशहर)। रामपुर खंड के कोटला ज्यूरी में ऐतिहासिक देरची मेले में देव आस्था और लोक संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। रक्षा बंधन के अवसर पर आयोजित मेले में देवी-देवताओं के आगमन से माहौल भक्तिमय हो गया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर देवलुओं और ग्रामीणों ने पारंपरिक नाटी डालकर मेले की रौनक बढ़ाई।
देवी सिंहासिनी के कोटला प्रांगण में आयोजित देरची मेले में देवता दत्त महाराज बसाहरा और महारुद्र काजल गसो विशेष रूप से पहुंचे। देवताओं के साथ आए देवलुओं ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर नृत्य किया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण भी देव मिलन और पारंपरिक उत्सव के साक्षी बने। देवताओं के साथ ग्रामीणों ने नाटी डालकर खुशी का इजहार किया।
देवी सिंहासिनी मंदिर कमेटी कोटला के अध्यक्ष केवल राम वर्मा ने बताया कि कोटला का ऐतिहासिक देरची मेला रक्षा बंधन के पर्व के साथ शुरू होता है। यह मेला क्षेत्र की प्राचीन देव परंपराओं, धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मेले में दूर-दूर से ग्रामीण पहुंचकर देवी-देवताओं का आशीर्वाद लेते हैं।
उन्होंने कहा कि मेले के दौरान देवताओं की उपस्थिति और देवलुओं के पारंपरिक नृत्य से पूरा क्षेत्र देवमय हो जाता है। ऐसे पारंपरिक मेले नई पीढ़ी को समृद्ध देव संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। देरची मेले में उमड़ी ग्रामीणों की भीड़ और देवताओं के साथ हुआ पारंपरिक नृत्य क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत की जीवंत तस्वीर पेश करता नजर आया।