बटेवडी के खीला उत्सव में पहुंचे लोग।
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चौपाल (रोहड़ू)। तहसील चौपाल की ग्राम पंचायत देवत के तहत ग्राम बटेवड़ी में धार्मिक उत्सव ‘खीला’ धूमधाम से मनाया गया। इस साल खील्ला उत्सव में बधान की राजपूत बिरादरी विजेता रही। पौराणिक परंपराओं अनुसार हर साल दीपावली के तीसरे दिन उत्सव आयोजित किया जाता है।
देवत के बटेवडी गांव में इस बार भी केदारी कुला देवता बटेवड़ी की उपस्थिति में ढोल नगाड़ों के साथ उत्सव का आयोजन किया गया। उत्सव में विभिन्न क्षेत्रों के हजारों लोगों ने भाग लिया। उत्सव में चंदान ब्राह्मण और बधान राजपूत बिरादरी के लोग नृत्य के साथ-साथ युद्ध अभिनय कर एक-दूसरे को पराजित करते हैं। लोक नृत्य के बाद एक आधा फीट की लकड़ी जमीन में गाढ़ी जाती है। मंदिर से देवता महाराज की पालकी की पदयात्रा के बाद जमीन में गाढ़ी गई लकड़ी जिसे स्थानीय भाषा में खीला कहते हैं, उस पर देवता की पालकी को रखा जाता है। इसके बाद ब्राह्मण जाति के लोग जिन्हें चंदान और राजपूत जाति के लोग जिन्हें बधान कहा जाता है, दोनों समुदाय के लोग एकत्र होकर उस लकड़ी के डंडे को खींचते हैं। इस खींचतान के समय कई बार दो-दो किलोमीटर तक चले जाते हैं। इस वर्ष दूसरी बार बधान राजपूत समुदाय ने जोर आजमाइश के बाद खीला खिंचकर जीत दर्ज की। इस परंपरा के साथ बटेवड़ी का खिला उत्सव संपन हो गया।