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बिना हथियार खनन माफिया के सामने खड़े कर दिए अफसर, गार्ड

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सांगला (किन्नौर)। जिले में खनन माफिया पर लगाम कसने का जिम्मा एक खनन अधिकारी, एक इंस्पेक्टर और दो गार्डों के कंधों पर है। खनन अधिकारी के पास वाहन नहीं है। दो गार्ड बिना हथियार के ड्यूटी दे रहे हैं। स्टाफ और सुविधाओं की कमी के चलते खनन पर लगाम कसना इनके बस की बात नहीं। जिला मुख्यालय रिकांगपिओ में खवांगी के पास साल 2015 से खनन विभाग का कार्यालय चल रहा है। यहां स्टाफ की भारी किल्लत है। चार वर्ष बीत जाने के बाद भी खनन कार्यालय में स्टाफ की तैनाती नहीं हो पाई है। वर्तमान में निचार खंड के उपमंडल भावानगर में एक गार्ड तैनात है, तो दूसरा पूह खंड के मूरंग में हथियार के बिना ड्यूटी दे रहे हैं। रिकांगपिओ कार्यालय में तैनात जिला खनन अधिकारी के पास वाहन ही नहीं है। चार साल से खनन कार्यालय में अधीक्षक, क्लर्क और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का पद रिक्त चल रहा है। किन्नौर के कल्पा, निचार और पूह खंड में 65 पंचायतें हैं। किन्नौर जिले में अवैध खनन नई बात नहीं है। बावजूद सरकार और प्रशासन स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए गंभीर नहीं है। प्रधान पूह सुमन साना, उपप्रधान सुशील साना, उपप्रधान सुंगरा राकेश नेगी, उपप्रधान कल्पा राजकुमार नेगी, जियालाल, भूमनेश्वर नेगी, अर्जुन नेगी, शांता नेगी, श्रवण नेगी और डीजी नेगी ने कहा कि जिले में अवैध खनन जोरों पर है। माफिया पर शिकंजा कसना जरूरी है लेकिन जिले में स्टाफ की भारी कमी है। ऐसे में माफिया के हौसले बुलंद हैं। ग्रामीणों ने सरकार ने अवैध खनन रोकने के लिए स्टाफ भेजने और सुविधाएं देने की मांग की है।
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जिला खनन अधिकारी बोले, बिना स्टाफ बेबस
जिला खनन अधिकारी गगन दीप ने बताया कि कार्यालय में स्टाफ की कमी और वाहन न होने से परेशानी रहती है। वाहन और स्टाफ के बिना घटनास्थल पर पहुंचना मुश्किल हो जाता है। सुरक्षा के लिहाज से बेबस हैं। उन्हें छोटी सी कार्रवाई के लिए भी पुलिस का सहयोग लेना पड़ता है। उन्होंने कहा कि वाहन के लिए स्वीकृति मिल चुकी है, जल्द ही टेंडर लगवा दिया जाएगा।
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