आरोपी बाइक चला रहा था अदालत में नहीं हुआ साबित
साल 2014 में रामपुर में हुआ था हादसा, एक युवक की गई थी जान
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर की अदालत ने लापरवाही से वाहन चलाने और गैर इरादतन हत्या के 11 साले पुराने मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। अदालत में यह साबित नहीं हो सका कि आरोपी ही बाइक चला रहा था। साल 2014 में रामपुर में हुए हादसे में बाइक सवार एक युवक की जान चली गई थी।
शिकायतकर्ता ने पुलिस को बयान दिया था कि 4 सितंबर 2014 को वह ट्रक में कुछ लोगों के साथ पुह जा रहा था। रामपुर के बजीर बावड़ी के पास सामने की तरफ से आ रहे बाइक सवार ने अचानक ब्रेक लगा दी। बाइक पर पीछे बैठा युवक ट्रक के टायर के नीचे आ गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। आरोपी नरेंद्र कुमार बाइक रहा था। यह दुर्घटना आरोपी की लापरवाही से बाइक चलाने के कारण हुई। शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। आरोपी को गिरफ्तार किया गया और जमानत पर रिहा कर दिया गया। जांच पूरी होने पर आईपीसी की धारा 279, 337 और 304-ए के तहत चालान अदालत में पेश किया गया। अभियोजन पक्ष ने कुल 10 गवाहों की जांच की। अदालत ने फैसला दिया है कि गवाहों के बयान वर्तमान मामले में आरोपी के अपराध को साबित करने में सक्षम नहीं हैं। अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा है कि दुर्घटना के समय आरोपी बाइक चला रहा था। रिकॉर्ड पर आए अन्य सबूत भी इस मामले में आरोपी का दोष साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। हालांकि, जांच अधिकारी ने अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन करने की कोशिश की है। फिर भी उनका बयान इस मामले में कोई समर्थन नहीं दे रहा है। इसका कारण यह है कि उनका बयान भी सुनी-सुनाई बात लगता है। कुल मिलाकर अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान आरोपी की लापरवाही और जल्दबाजी को साबित करने में सक्षम नहीं हैं। इसलिए आरोपी को दोषी ठहराना असुरक्षित होगा।