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Rampur Bushahar News: एक पीएचसी की दास्तान, तीन बार उद्घाटन, पर नहीं कहीं निशान

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चौपाल उपमंडल की दूरदराज ग्राम पंचायत किरण के कयूंथोली में पीएचसी की दो उद्घाटन पट्टिकाएं
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निजी भवनों में किराये की दीवारों पर लटकी रह गईं बस पटि्टाएं
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दुर्गम पंचायत में ग्रामीणों को इलाज के लिए जाना पड़ रहा है दूसरे राज्य उत्तराखंड
2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह ने एक निजी भवन में किया था उद्घाटन
विपिन कुमार


चौपाल (रोहड़ू)। दुर्गम क्षेत्र के गांवों तक सरकार की घरद्वार स्वास्थ्य सुविधाओं की योजनाएं सिर्फ घोषणाओं और पट्टिकाओं तक ही सीमित होकर रह गई हैं। उपमंडल चौपाल की दुर्गम पंचायत किरण के कयूंथोली में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) की ऐसी ही हाल बयां करती दास्तान है। इस पीएचसी का निजी भवनों में तीन बार उद्घाटन किया गया। भाजपा की सरकार के दौरान एक और कांग्रेस की सरकार के दौरान दो बार उद्घाटन हुआ। दो बार डिनोटिफाई किया गया। आज यह पीएचसी कहीं नहीं चल रहा है न किसी निजी भवन में और न ही इस पीएचसी को अपना कोई भवन मिल पाया है। आज यह स्वास्थ्य केंद्र जमीन पर कहीं भी नजर नहीं आ रहा है। वहीं, पंचायत के करीब एक दर्जन गांवों के लोग ढाई दशक से इलाज को तरस गए हैं। पंचायत के लोगों को बच्चों के टीकाकरण और छोटी-छोटी बीमारी के इलाज के लिए भी 23 किलोमीटर दूर उत्तराखंड के त्यूणी जाना पड़ता है।
तीन बार उद्घाटन और दो बार डिनोटिफाई की सियासत में स्वास्थ्य सुविधाओं ने तोड़ा दम
पंचायत के थंगाड़ गांव के वार्ड मेंबर देवेंदर सिंह ने इस पीएचसी की दास्तान को बयां करते हुए आरोप लगाए कि पहली बार साल 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह ने चुनाव से पहले नौ अक्तूबर को उद्घाटन एक निजी भवन में किया था। जिसे सत्ता में आते ही भाजपा सरकार ने डिनोटिफाई कर दिया। फिर विधानसभा चुनाव से पहले 14 अक्तूबर 2022 को तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री राजीव सहजल ने एक बार फिर पीएचसी का उद्घाटन किया। हद तो तब हो गई जब वर्तमान कांग्रेस सरकार ने सत्ता संभालते ही इसे एक बार फिर डिनोटिफाई किया। फिर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने लोकसभा चुनाव से पहले वर्ष 2024 में एक बार फिर पीएचसी का शिलान्यास कर दिया है, लेकिन धरातल पर स्वास्थ्य केंद्र आजतक नहीं आया है। वार्ड मेंबर देवेंदर सिंह ने बताया कि आज पीएचसी की उद्घाटन पट्टिकाएं किसी के घर के अंदर तो एक किसी के घर के बाहर दीवार पर सुसज्जित हैं।
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स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर ठगी गई जनता
आज आलम यह है कि लोग इस पीएचसी को ढूंढते फिर रहे हैं। कई वर्ष पूर्व थंगाड़ में एक डिस्पेंसरी हुआ करती थी, जोकि 8 अगस्त 1998 को पहाड़ी से गिरे एक बड़े पत्थर की चपेट में आकर तहस-नहस हो गई थी। बीते अढ़ाई दशक से ग्रामीणों को बच्चों के टीकाकरण और छोटी-छोटी बीमारी के इलाज के लिए भी 23 किलोमीटर दूर उत्तराखंड के त्यूणी जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि क्यूंथोली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन होने के बाद ग्राम पंचायत किरण के जबाच, बानजड़, थिथरौली, थंगाड़, मानगड़, खुरोग, शावड़ा, बंगेवड़ी, डूंगा, ज़िपटाह एवं मनेवटी आदि करीब एक दर्जन गांव के अलावा टेलर पंचायत के सैकड़ों लोगों को घर के नजदीक स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की आस जगी थी, लेकिन पीएचसी के प्रति सरकार की अनदेखी से इन एक दर्जन गांव के लोग अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं ।
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जल्द किसी निजी भवन में फिर शुरू करने की मांग
किरण पंचायत के वरिष्ठ नागरिक विजय जुरटा, पूर्ण चंद शर्मा, राकेश सिंगटा, पूर्व उप प्रधान करम सिंह, दलिया सिंह, कुंदन सिंह, रीना देवी, गुमान सिंह, महिला मंडल प्रधान सीमा चौहान, शीला चौहान, रीना देवी, निशा, रक्षा ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाईं है कि ग्राम पंचायत किरण में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए भूमि का चयन होने तक इसे किसी निजी भवन में चलाया जाए। -संवाद
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