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Rampur Bushahar News: कुफरी बहार के टिशू कल्चर तकनीक से उगाया जाएगा आलू

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केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान शिमला ने बैठक में लिया निर्णय
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संवाद न्यूज एजेंसी

ठियोग (रामपुर बुशहर)। अब फिर से कुफरी बहार के टिशू कल्चर तकनीक से आलू उगाया जाएगा। केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) शिमला की रिवॉल्विंग फंड मैनेजमेंट कमेटी ने देश में व्यापक रूप से उगाई जाने वाली आलू की किस्म ‘कुफरी बहार’ के टिशू कल्चर आधारित गुणन को दोबारा शुरू करने की मंजूरी प्रदान कर दी है। यह निर्णय सोमवार को आईसीएआर-सीपीआरआई शिमला में आयोजित वर्ष 2026–27 की आरएफएसएमसी की वार्षिक बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता सीपीआरआई के निदेशक एवं आरएफएसएमसी के अध्यक्ष डॉ. ब्रजेश सिंह ने की। डॉ. सिंह ने बताया कि बैठक की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि किसानों की वास्तविक मांग को ध्यान में रखते हुए ‘कुफरी बहार’ के टिशू कल्चर आधारित गुणन को दोबारा प्रारंभ करने की स्वीकृति रही। उन्होंने कहा कि टिशू कल्चर तकनीक के माध्यम से रोगमुक्त और उच्च गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री का तीव्र गति से उत्पादन संभव हो पाता है, जिससे बीज उत्पादन प्रक्रिया अधिक प्रभावी और तेज बनती है। इससे गुणवत्तापूर्ण बीज सामग्री की उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि होने और किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
बैठक में डॉ. विनोद कुमार, डॉ. राजेश कुमार सिंह, डॉ. सुभाष कटारे, डॉ. अनिल शर्मा, डॉ. एस.पी. सिंह, डॉ. अश्विनी कुमार शर्मा, डॉ. संजीव शर्मा, डॉ. आलोक कुमार, डॉ. जगदेव शर्मा, डॉ. सोम दत्त, डॉ. तनुजा बक्सेठ और डॉ. दिव्या ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने आलू बीज उत्पादन और भविष्य की रणनीतियों पर भी चर्चा की।
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उत्तर प्रदेश में 70 प्रतिशत से अधिक हिस्से में होती है कुफरी बहार की खेती

यह निर्णय विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां आलू उत्पादन क्षेत्र के 70 प्रतिशत से अधिक हिस्से में कुफरी बहार की खेती की जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल बीज गुणन प्रक्रिया को गति देने, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने और किसानों की उत्पादकता और फसल प्रदर्शन में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बैठक के दौरान संस्थान मुख्यालय और विभिन्न क्षेत्रीय केंद्रों मोदीपुरम, ग्वालियर, जालंधर, पटना, कुफरी-फागू, ऊटी और शिलांग की ओर से प्रस्तुतियां दी गईं, जिनमें प्रगति की समीक्षा, क्षेत्रीय चुनौतियों का आकलन और आलू बीज उत्पादन नेटवर्क को मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। बीज उत्पादन की कार्यक्षमता बढ़ाने और आलू बीज आपूर्ति शृंखला को और सशक्त बनाने से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से विचार किया गया।
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